करनाल, 24 दिसंबर -सेहत की तरफ बढ़ते रुझान को देखते हुए ज्यादा से ज्यादा लोग आर्गेनिक खेती तरफ आकर्षित हो रहे हैं.ऐसा ही एक प्रयास करनाल के बागवान रमन का है, जो रसायनिक उर्वरकों के प्रयोग के बिना कश्मीरी ऐपल बेर की ऑर्गेनिक खेती से ले रहे है लाखो का मुनाफा.
थाईलैंड से आयातित प्रजाति का कश्मीरी एप्पल बेर प्रदेश के किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो रही है।दरअसल विदेशी प्रजाति के बेर की खेती महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बंगाल, केरल आदि राज्यों में होती है। रमन ने इसकी सफल खेती करके प्रदेश के अन्य किसानों को इसकी खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया है।इस प्रजाति का एप्पल बेर रंग और आकार में हूबहू सेब की तरह दिखता है। खास बात यह है कि इसमें सेब और बेर दोनों का स्वाद आता है। एक वर्ष से भी कम समय में फलोत्पादन वाले इस एप्पल बेर की बागवानी कम ऊंचाई वाले पहाड़ (जहां न्यूनतम तापमान माइनस में न जाता हो) और मैदानी भागों में की जा सकती है।
किसान अब आधुनिक खेती की और अपना रुख कर रहे हैं। इसी कड़ी में करनाल के सांभली गांव के बागवान रमन ने दो एकड़ जमीन पर एक प्रयोग किया है।रसायनिक उर्वरकों के बिना कश्मीरी रेड एप्पल बेर की ऑर्गेनिक खेती से वह लाखों का मुनाफा ले रहे हैं।इस फल का स्वाद,मिठास व गुणवत्ता अदभुत है।
कैसे और कब की शुरुआत:
बागवान रमन बताते है कि अपने एक मित्र की सलाह से उन्होंने 2020 में उन्होंने 2 एकड़ जमीन पर कश्मीरी एप्पल बेर के लगभग 200 पौधे लगाकर इस खेती की शुरुआत की। इन पौधों में ज्यादा खाद पानी की जरूरत नही है।रमन बताते है कि इस किस्म के पेड़ की ग्रोथ बहुत ही जल्दी होती है और फल भी जल्दी आ जाता है। 2020 जून के महीने में हमने इसका पौधा रोपण किया और 2021 फरवरी के महीने में हमने इसका फल लेना शुरू कर दिया था।पहले इस पर लाल रंग आता है फिर संतरी ओर फिर यह पीले रंग में आ जाता है। यह फल वेहद मीठा होता है।
देखभाल कैसे की जाती है:
रमन बताते है कि ज्यादातर इस किस्म के पौधों की सामान्यतः कोई विशेष देखभाल की जरूरत नही होती है। आमतौर पे इसमें बारिश के पानी से ही काम चल जाता है। फरवरी से अप्रैल महीने तक इसका फल उतारने के बाद पेड़ो की कटिंग की जाती है। सितंबर के महीने में जैसे ही पेड़ों पर फ्लोवेरिंग होनी शुरू हो जाती है तड़ पेड़ो की जड़ के आसपास पानी को एकत्रित नही होने देना चाहिये। बस इन्ही बातों का ध्यान रखने से हम अच्छा फल इन पेड़ों से प्राप्त कर सकते हैं। रमण बताते है कि इस कश्मीरी एप्पल बेर का स्वाद,मिठास और गुणवत्ता में अदभुत है। पौधों में बीमारी को लेकर रमन ने बताया कि वैसे तो बीमारियां हर पौधों में लगती हैं लेकिन अब तक हमारे अनुभव के अनुसार हमें कोई भी बीमारी का सामना नही करना पड़ा है।इसको हम बीमारी मुक्क्त पौधा भी कह सकते है।
पैदावार:
रमन बताते है कि अनुमानित एक पौधे से 200 से 250 किलो फल की पैदावार हो जाती है जिसकी मंडी में कीमत रु80 से रु100 और रु120 तक मिल जाती है।ऑर्गेनिक तरीके से खेती करने की विधि को रमन ने बहुत ही बढ़िया बताया,उन्होंने कहा कि इससे किसान भाई जहरीले स्प्रे करने से बच जाता है। आंकड़े बताते है कि हर वर्ष बहुत से किसानों की इन रसायनिक जहरीले पेस्टिसाइड का स्प्रे करते समय मौत हो जाती है। रसायनिक खेती से खुद भी बचो और दूसरों को भी बचाओ। शुद्ध खेती करके आप स्वंय, अपने परिवार व समाज सहित पूरे देश के लोगो को बड़ी से बड़ी घातक कैंसर जैसी बीमारियों से बचा सकते हो।
देश विदेश से लोग लेने आते है जानकारी:
रमन ने बताया कि देश विदेश से बहुत से लोग इस खेती से प्रभावित है। वो इस खेती की जानकारी लेने के लिए आते है। विदेशी लोग ऑर्गेनिक खेती की ओर काफी आकर्षित हो रहे है। जितनी भी हमे इस खेती के बारे में जानकारी है हम लोग उन्हें बताने का प्रयास करते है।
वही फ्रांस से पहुंची महिला गेरिल ने बताया कि रसायनिक खेती से ज्यादा मैं ऑर्गेनिक खेती से बहुत ही प्रभावित हूँ। इस प्रकार की फार्मिंग की तकनीक को मैं अपने देश मे भी ले जाना चाहूंगी। मुझे जहां आकर बहुत अच्छा लगा।







