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बीरेद्र सहू देश के युवा किसानो को फल फरुट की खेती को लेकर सैकडो युवाओं को दे चुके प्रशिक्षण

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हिसार 24 दिसंबर-हरियाणा के जागरुक किसान वीरेद्र सहू द्वारा पांच फसलों की (41) वैरायटी की पौध  बाहर 12 राज्य में जा रही है, वे लगातार सैकडो युवा किसानो को ट्रैनिक दे चुके है और युवाओ को जागरुक करके  फल फरुट की खेती की अच्छी तकनीके बारे में बता कर आमदनी कमाने का जरिए दे रहे है।
हिसार में हरियाणा के कृषि मंत्री गांव श्याम सिंह राणा ने गिगोरानी के रहने वाले किसान बीरेंद्र सहू को संमानित किया है। पर्यावरण संरक्षण के लिए वे निशुल्क स्कूल बच्चो को पोध वितरित भी कर रहे है। गिगोरानी के रतीले टिल्लो इंडो इजराइल तकनीक से किन्नू अमरुद तरबूज व खरबूजा की बागवानी कर किसान बीरेद्र साहू ही नही आस पास के ईलाको में किसानो की तरकदीर बदल दी है।  बीरेद्र सहू द्वारा तैयार की गई नर्सरी को नैशनल होरटीकल्चर बोर्ड एनएचबी से तीन स्टार हासिल है।  उनकी वर्णिका फूट नर्सरी में तैयार पौधे आंद्र प्रदेश तेलगाना मध्य प्रदेश हिमाल प्रदेश राजस्थान पंजाब छतीसगड गुजरात उतर प्रदेश महाराष्ट्र व तिरुपति दिल्ली तक पहुचा रहे है।
कई राज्यो में जा रही है उनकी पौधे
राजस्थान की सीमा दस किलो मीटर दूर होने पर सिचाई के पानी की कम व्यवस्था में भी बीरेद्र साहू बागवानी को कारगर करके दिखाया उनके नर्सरी में तैयार पांच बागवानी फसलो चालीस से ज्यादा बैरायटी की डिमाड़ देश पर के बाहर राज्य में है हरियाणा कृषि विश्वविदयाल में राज्य स्तरीय किसान मेले में कृषि मंत्री ने बीरेद्र सिंह को संमानित किया है। उनकी वर्णिका फूट नर्सरी में तैयार पौधे आंद्र प्रदेश तेलगाना मध्य प्रदेश हिमाल प्रदेश राजस्थान पंजाब छतीसगड गुजरात उतर प्रदेश महाराष्ट्र व दिल्ली तक पहुच रहे है। उनको फसल विविधि करण और उच्च तकनीक नर्सरी के क्षेत्र में हरियाणा सरकार से राज्य स्तरीय पुरस्कार मिल चुका है अटल भूजल योजना के तहत पानी की  बचत को लेकर भी किसानो को प्रशिक्षण देते है पर्यावरण सरक्षण के लिए वे निशुल्क स्कूल बच्चो को पोध वितरित भी कर रहे है।
टपका विधि से होती है सिचाई
बीरेद्र सहू के बाग में इंडो इजराइल  तकनीक से टपका विधि से सिचाई होती है .इस तरह से  सिचाई से एक चौथाई पानी की जरुरत रहती है, इसके साथ ही वे मल्चिंग विधि को भी अपना रहे है. इसमें धान की पराली या घास की एक परत खेत में पहले नीचे बिजाई जाती है,ताकि ज्यादा गर्मी में पानी का वापसी करण कम हो नर्सरी में नट हाऊस पोली हाऊस बनाए गए है बाग पूरे नही लगते तब तक इंटर क्रोपिंग से खरबूजा व तरबूज की फसले ली जाती है.
तीन स्टार हालिस है उनकी नर्सरी को
बीरेद्र सहू द्वारा तैयार की गई नर्सरी को नैशनल होरटीकल्चर बोर्ड एनएचबी से तीन स्टार हासिल है. यहा तैयार सीड लैस किन्नू की हरियाणा के अलावा पंजाब व राजस्थान में काफी मांग रहती है.पंजाब यूनिवस्टी से सीडलैस किन्नू लाकर उन्होंने यहां नर्सरी में पौध तैयार की है.नर्सरी में नीबूं की बारह बैरायटी, माल्टी की बाहर वैरायटी, मौसम की दस वैरायटी, सिडलेस किन्नू की एक बैरायटी, अमरुद की छह बैरायटी की पौध इस समय उपलबध है।
सताई एकड में बाग है
बीरेद्र सहू ने बताया कि हिसार के डीएन कालेज से  1991 में एमए हिन्दी की प ढाई पूरी की थी.इसके बाद साल 2002 में खेत में बागवनी की ठानी थी और उनके ऐरिया में पानी की किल्लत थी। उस समय सात एकड़ में अपरुद का बाग लगाया और सताई एकड में किन्नू अमरुद तरबूज खरबूज के बाग है,उनके गांव गिगोरानी के अलावा आस पास के गांव चडीवाल, सहूवाला, दडबा, रुपावास जमाल में भी  उनसे किसान प्रशिक्षण ले कर बागवानी कर रहे है।आस पास के गांव के अलावा राजस्थान व पंजाब के किसानो को भी ट्रेनिग देते है। किसानो की खेती में बदलाव किया और फू्रटों की वैरायटी में लगाई है। उन्होंने कहा कि धान को पैदा करने के लिए ज्यादा पानी लगता है परंतु हम चाहते है किन्नू अमरुद पर पौधे लगा कर खेती रहे है। बीरेद्र सहू ने कहा कि युवा किसानी खेती मेंबदलाव कर सकते है।
युवाओं को बागवानी की खेती करनी चाहिए
वीरेद्र सहू के अनुसार किसानो के पास सब कुछ है युवाओं को बागवानी अपनानी चाहिए। एक एकड में नर्सरी में अस्सी हजार पौधे तैयार करते है। पानी का वाटर नीच रहा है पानी को बचाना है कम पानी में ज्यादा वैरायटी तैयार का लक्षय है कागजी नीबू की नई वैरायटी ला रहे है.देश के सभी राज्यो में पौधे भेजे जा रहे है। बीरेद्र सहू ने किसानो से अपील है कि युवा उनसे प्रशिक्षण ले सकते है।

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