गुरुग्राम : 6 अगस्त ( TSN)- विश्व के मानचित्र पर साइबर सिटी, मेडिकल हब और शिक्षा का हब बन चुका गुरुग्राम अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। आलम यह है कि विकास कागजो में सिमट कर रह गया गए। सिंगापुर की तर्ज पर गुरुग्राम का विकास करने की बात करने वाली भाजपा की सरकार व उसके अधिकारी मस्त और गुरुग्राम के नागरिक त्रस्त। जी हां तस्वीरे बयान कर रही है गुरुग्राम के विकास की तस्वीर। नए गुरुग्राम की बात करे या फिर पुराने गुरुग्राम की. तस्वीरें बता रही है कि पिछले दस सालों में गुरुग्राम का जो हाल हुआ है,उतना हरियाणा बनने के बाद कभी नही रहा।
जरा सी बरसात होते ही सड़के तालाब में तबदील
बता दें कि 2014 से पहले नम्बर वन पर रहने वाले गुरुग्राम की पहचान अब कूड़ा ग्राम के रूप में बनती जा रही है। सेक्टर-4,5 की बात करे तो हरियाणा विकास प्राधिकरण ने सेक्टर तो बसा दिए, लेकिन प्रॉपर प्लानिग न होने के चलते यहा के निवासियों के गले की फांस बन गई। जरा सी बरसात होते ही सड़के तालाब में तबदील हो जाती है। इतना ही नही सीवर ओवरफ्लो हो रहे है, जिसके चलते सेक्टर में बने भगवान श्री राम मंदिर में दर्शनार्थ आने वाले श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ना तो विधायक उनकी सुनता है और ना ही सांसद | गुहार लगा के थक चुके है कोई सुध लेने की नहीं तैयार.गलियों में भरे सीवर के पानी और उससे उठने वाली बदबू के चलते बुजुर्ग सबसे ज्यादा दुखी है। न तो पार्क में जा पा रहे है और न ही मंदिर। इसके अलावा सबसे ज्यादा स्कूली बच्चो को सुबह-सुबह इस गंदे पानी से गुजर कर स्कूल जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। यह हाल केवल सेक्टर-4 व 5 का नही है बल्कि अन्य सेक्टरों ओर कालोनियों का हाल भी बद से बद्दतर है। सेक्टर-7 में खुले सीवर के ढक्कन दुर्घटनाओं को न्यौता दे रहे है। यही हाल साइबर सिटी की कृष्णा कालोनी, न्यू कालोनी का है।
जिला प्रशासन के दावे ठीक इसके उलटे
भले ही जिला प्रशासन गुरुग्राम को विकसित करने का और स्वछता की दौड़ में नम्बर वन बनाने का दावा करते हो, लेकिन जिला प्रशासन के दावे ठीक इसके उलट नजर आ रहे है। बरसाती पानी की उचित निकासी न होने के चलते एक से दो घण्टे की बरसात में गुरुग्राम का हाल बेहाल हो जाता है। दिल्ली-जयपुर हाइवे की बात करे या फिर नए ओर पुराने गुरुग्राम की जब जगह जाम की सिथित पैदा हो जाती है। सड़के तालाब में बदल जाती है। बीते दिनों साइबर सिटी में वाहन चालकों को महाजाम का दंश झेलने को मजबूर होना पड़ा था।







