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स्टॉक मार्केटिंग में ट्रेडिंग के नाम पर 854000 की साइबर ठ*गी .. साइबर क्रा*इम टीम ने किया गिर*फ्तार

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फरीदाबाद : चन्द्रिका ( TSN)- फरीदाबाद में स्टॉक मार्केटिंग में ट्रेडिंग के नाम पर फरीदाबाद के रहने वाले एक व्यक्ति से 854000 की ठगी करने वाले गिरोह के 7 सदस्यों को साइबर क्राइम फरीदाबाद की टीम ने दिल्ली सहित अलग-अलग इलाकों से गिर*फ्तार किया है । गिर*फ्तार किए गए आरोपियों के कब्जे से 22500 रुपए,4 मोबाइल फोन, 7 चेक बुक और तीन डेबिट कार्ड बरामद किए गए हैं । साइबर क्रा*इम एसीपी ने जानकारी देते हुए बताया कि इन साइबरों  के तार चीन में बैठे साइबर ठ*गों के साथ जुड़े हुए हैं।
एसीपी साइबर अभिमन्यु गोयत ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि गिर*फ़्तार किए गए आरोपियों में अमित, सुनील उर्फ राजू, मयंक, सागर, कृष्णावीर, नीरज कुमार तथा अर्जुन का नाम शामिल है। आरोपी अमित, सुनील, मयंक, सागर व कृष्णावीर उत्तर प्रदेश तथा आरोपी नीरज नई दिल्ली व अर्जुन पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। आरोपी मयंक एचडीएफसी बैंक में मैनेजर की नौकरी करता था. वहीं आरोपी कृष्णावीर इंडसइंड बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर के तौर पर तैनात है। दिनांक 23 जनवरी को साइबर थाना एनआईटी में धोखा*धड़ी की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसमें आरोपियों ने फरीदाबाद के रहने वाले एक व्यक्ति के साथ स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग के नाम पर 8.54 लाख रुपए की धोखा*धड़ी की वार*दात को अंजाम दिया था।
आरोपियों के चीन से जुड़े हुए हैं तार
पीड़ित की शिकायत पर थाने में मुकदमा दर्ज करके मामले की जांच के लिए थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अमित के नेतृत्व में पुलिस टीम का गठन किया गया.  इस मामले में कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए तथ्यों के आधार पर 29 फरवरी को दिल्ली एनसीआर एरिया से आरोपी अमित, नीरज, मयंक और  सागर को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद  उनकी जानकारी के आधार पर आरोपी अर्जुन, सुनील और  कृष्णवीर को भी गिर*फ्तार किया गया। आरोपियों को अदालत में पेश करके 6 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया,जिसमें पुलिस रिमांड के दौरान सामने आया कि मामले के मुख्य आरोपी अमित और  सुनील हैं जो चीन के किसी मेक नाम के व्यक्ति के साथ टेलीग्राम पर संपर्क में थे। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी शेयर मार्केट में ट्रेडिंग के लिए एक असली कंपनी की वेबसाइट जैसी ही एक फर्जी वेबसाइट बनाकर उसमें ट्रेडिंग करवाते थे तथा जब उसे वेबसाइट में वह व्यक्ति अच्छा खासा पैसा जोड़ देता था तो वह पैसा अपने खातों में ट्रांसफर कर लेते थे। आरोपी फर्जी सिम कार्ड और आरोपियों में शामिल बैंक कर्मचारी इन्हें फर्जी खाते उपलब्ध करवाते थे।

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