दिल्ली (एकता): मशहूर पंजाबी गायक हंस राज हंस एक मशहूर गायक हैं। गायकी के साथ-साथ उन्होंने राजनीति में एंट्री की और राजनीतिज्ञ बने। वह भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं और पद्म श्री के नागरिक सम्मान के प्राप्तकर्ता हैं। वह पंजाबी लोक और सूफी संगीत के साथ-साथ फिल्मों में भी गाते हैं और उन्होंने अपने ‘पंजाबी-पॉप’ एल्बम भी जारी किए हैं। हंस राज हंस की जिंदगी में काफी मुश्किलें आईं और उन्होंने मेहनत से मुकाम हासिल किया। बता दें कि आज यानि 9 अप्रैल को वह अपना 61वां जन्मदिन मना रहे हैं। पंजाब के प्रसिद्ध गायक हंस राज हंस ने अपनी गायिकी से लाखों लोगों का दिल जीता है। उनके कई गाने काफी मशहूर हैं। हर कोई उनके गाने सुनने के शौकीन हैं। बता दें कि हंस राज हंस का जन्म 9 अप्रैल, 1962 को पंजाब के एक छोटे से गांव शफीपुर में हुआ था। हंस राज हंस का जन्म बेहद गरीब परिवार में हुआ था। एक दौर था जब हंसराज हंस के पास खाने तक के पैसे नहीं थे। उनके हाथ से खाने की थाली तक छिन गई। गरीबी के दिनों में उन्होंने इतनी मेहनत की कि अब पूरी दुनिया उनकी फैन हैं।

ऐसे रखा था पंजाबी इंडस्ट्री की दुनिया में कदम
हंसराज हंस ने पंजाबी इंडस्ट्री की दुनिया में काफी संघर्षों के बाद कदम रखा। उनके दो कैसेट रिलीज हुए थे। लेकिन उस समय इससे उन्हें कामयाबी नहीं मिली, जिससे उनके गरीबी के दिन दूर हो सके। उनके पास पैसे नहीं थे। एक समय ऐसा भी था जब उन्हें शाम तक का खाना नहीं मिलता था। हंसराज खाने की थाली पकड़े हुए था और उसने कहा कि मेरे पास पैसे नहीं हैं। यह सुनकर विक्रेता ने उसके हाथ से थाली छीन ली। उन्हें कई जगह ठोकरें खानी पड़ीं थी। कई सालों बाद वह सिंगर बने। तब उन्होंने सुकून की सांस ली। वह फिर उस व्यक्ति के पास गया जिसने उस समय उसके हाथ से थाली छीनी थी। हंसराज ने उसको 2 हजार रुपए दिए और कहा कि जो भी तुम्हारे पास आए, उसे भूखा मत सोने देना।

हंस राज हंस के एक दोस्त ने जिदंगी में दिया साथ
बता दें कि उनके एक दोस्त सतनाम सिंह गिल ने काफी मदद की। वह दोनों बचपन से साथ थे। एक दिन दोनों दोस्त यारा फिल्म देखने गए थे। दोनों ने फिल्म देखी और फिल्म देखने के बाद उनके दोस्त सतनाम ने कहा, ‘अमिताभ और अमजद की तरह हम दोनों किशन और बिशन हैं। इसके साथ ही उनके दोस्त ने कहा कि मैं तेरे सिंगर बनने में मदद करूंगा।

हंस राज का जानिए राजनीतिक सफर
हंस राज हंस ने गायक होने के साथ-साथ राजनीतिक में काफी दमखम दिखाया। उन्होंने गायकी की दुनिया में शोहरत कमाई फिर राजनीति में कदम रखा। पंजाब के दोआबा क्षेत्र में हंस राज्य का काफी प्रभाव है। यह देखकर हंस राज को राजनीति के मैदान में लाया गया। इसके साथ ही 2009 में लोकसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल के टिकट पर उन पर दांव खेला। इसके बाद वह 2014 में कांग्रेस में शामिल हो गए, लेकिन उनकी रुचि खो गई और दिसंबर 2016 में वे बीजेपी में शामिल हो गए।








