करनाल (अंकुर कपूर): इस साल बसंत पंचमी 26 जनवरी को पड़ रही है। संयोग से इस दिन गणतंत्र दिवस भी मनाया जाएगा। सरसों की हरी पत्तियां व उसके ऊपर खिले पीले-पीले फूल बसंत ऋतु के आने का पहले ही संकेत देने लग जाती हैं। ठीक उसी प्रकार विद्यादायिनी मां सरस्वती की प्रतिमा बना रहे मूर्तिकार भी प्रतिमा निर्माण में जोर-शोर से जुट चुके हैं। वही करनाल स्तिथ नमस्ते चौंक पर राजस्थान से आए 10 से 15 मूर्तिकारों का समूह मां सरस्वती की प्रतिमा बनाने में जुटा हुआ है। नए-नए प्रकार की छोटी बड़ी रंग-बिरंगी मूर्तियों को बना कर रखा गया है।
मूर्तिकार का कहना है कि लगभग कोरोना काल के 2 साल बाद काम तो शुरू हुआ है लेकिन मंदी के चलते हालत पतली है। एक बड़ी प्रतिमा के निर्माण 10 से 15 दिन का समय लगता है और छोटी मूर्ति को 6 से 7 दिन लगते हैं लेकिन सही मुल्य नहीं मिलने के कारण निराशा होती है। मूर्तिकार महिला राधा बताती है कि पुस्तैनी रोजगार होने के कारण प्रतिमा निर्माण कार्य मे जुडे हुए हैं और काम हमें आता नहीं है। महंगाई के दौर में प्रतिमा निर्माण में जितना समय लगता है उसके अनुकूल पैसा नहीं मिलता है।

आपको बता दें हिन्दू धर्म में बसंत पंचमी का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसी दिन मां सरस्वती का प्रादुर्भाव हुआ। माता सरस्वती विद्या की देवी हैं। उनके पास 8 प्रकार की शक्तियां हैं- ज्ञान, विज्ञान, विद्या, कला, बुद्धि, मेधा, धारणा और तर्कशक्ति। ये सभी शक्तियां माता अपने भक्तों को प्रदान करती हैं। इस ऋतु के प्रवेश करते ही संपूर्ण पृथ्वी वासंती आभा से खिल उठती है। माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को वसंत ऋतु का आरंभ स्वीकार किया गया है और इसे महत्वपूर्ण पर्व की मान्यता दी गई है।








