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इस ऐतिहासिक गुरुद्वारे में रुके थे सिखों के नौवें गुरु, जानिए क्या है रहस्य (देखें तस्वीरें)

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कैथल (एकता): भारत में हर ऐतिहासिक धार्मिक स्थल का अपना कुछ खास महत्व, रहस्य होता है। हर किसी मंदिर या गुरुद्वारे का अपना इतिहास होता है। ऐसा ही एक गुरुद्वारा कैथल शहर के डोगरा में स्थित है। यह गुरुद्वारा नीम साहिब के नाम से प्रसिद्ध है। यहां लोगों का काफी आना-जाना लगा रहता है। गुरुद्वारा नीम साहिब की रेलवे स्टेशन से दूरी तीन किलोमीटर तो बस स्टैंठ से दूरी करीब पांच किलोमीटर की है। यह गुरुद्वारा डोगरा गेट से मानस और गांव बाबा लदाना में जाने वाले मार्ग पर स्थित है।
नीम के पेड़ के नीचे बैठकर गुरु तेग बहादुर जी ने की थी भक्ति

बताया जाता है कि यहां मुगलों से युद्ध के दौरान सिखों के नौंवे गुरु तेग बहादुर दिल्ली जाते हुए यहां रुके थे। खास बात यह है कि नीम के पेड़ के नीचे बैठकर भक्ति करने लगे। लोगों का कहना है कि यह जगह आज भी गुरुद्वारे में स्थित है। अमावस्या के दिन यहां श्रद्धालुओं की स्नान के लिए भीड़ लगी रहती है। लोग अपनी मुरादें पूरी करने यहां पहुंचते हैं।

साल 1723 ई में गुरुद्वारे पहुंचे थे सिख गुरु

मान्यता है कि गुरुद्वारे के स्थान पर सिख गुरु तेग बहादुर अपने परिवार के साथ साल 1723 ई में यहां पहुंचे थे। लोगों का कहना है कि जब वह यहां भक्ति में लीन थे तो किसी ने उन्हें देख लिया था जिनमें से एक व्यक्ति को काफी तेज बुखार हो गया। गुरुजी ने उन्हें खाने के लिए नीम के पत्ते दिए और वह स्वस्थ हो गया। तभी से यह गुरुद्वारा नीम साहिब के रूप में जाना जाता है।

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