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पलवल में कृषि किसान कल्याण विभाग ने प्राकृतिक खेती को लेकर करवाया सम्मेलन (देखें वीडियो)

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पलवल (अंकुर कपूर): पलवल, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग पलवल द्वारा आज प्राकृतिक खेती को लेकर एक दिवसीय किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें अतिरिक्त उपायुक्त हितेश कुमार ने बतौर मुख्यतिथि शिरकत की। इस अवसर पर कृषि उपनिदेशक डॉ. पवन कुमार शर्मा,जिला बागवानी अधिकारी डा. अब्दुल रज्जाक,डॉ.रेखा,कृषि विशेषज्ञ डॉ. महावीर मलिक,प्रगतिशील किसान कल्ब के प्रधान बिजेंद्र दलाल मौजूद थे। किसान गोष्ठी में प्राकृतिक खेती करने के इच्छुक 125 किसानों ने भाग लिया।

अतिरिक्त उपायुक्त हितेश कुमार ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि किसान फसलों में रसायनिक खादों का प्रयोग कम करें। रसायनिक खादें भूमि के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालती है। उन्होंने कहा कि किसान प्राकृतिक खेती करें। प्राकृतिक खेती करने से भूमि के स्वास्थ्य में सुधार होगा। भूमि का स्वास्थ्य ठीक होने पर फसल के उत्पादन में बढोत्तरी होगी और गुणवत्ता भी बढेगी। अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि किसानों को सरकार द्वारा चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं को भी लाभ उठाना चाहिए। किसान जानकारी के आभाव में सरकार की योजनाओं से वंचित रह जाते है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सरकार द्वारा चलाई गई है। किसान कम प्रीमियम देकर योजना का लाभ ले सकते है। यदि प्राकृतिक आपदा से फसलों को नुकसान पहुंचता है तो उसकी भरपाई बीमा कंपनी द्वारा की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसान मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर जाकर फसलों का पंजीकरण अवश्य करवाऐं। ताकि मंडी में फसलों की खरीद के दौरान कोई परेशानी न हो और किसानों को फसलों का उचित मूल्य मिल सके।

प्राकृतिक खेती करने के लिए जिन किसानों ने विभागीय पोर्टल पर अपना पंजीकरण किया है,ऐसे किसानों को प्राकृतिक खेती करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा हैै। कृषि विभाग के विशेषज्ञों द्वारा किसानों को जीवामृत बनाने की विधि के बारे में जानकारी दी जा रही है। किसान 200 लीटर पानी में 10 लीटर देशी गाय का गोमुत्र और 10 किलोग्राम देशी गाय का ताजा गोबर व 1 मुठ्ठी मेढ की मिट्टी, 1किलोग्राम गुड और 1 किलोग्राम बेसन का घोल प्लास्टिक के ड्रम में तैयार करें। इसे लकडी की सहायता से सुबह और शाम को दो टाइम हिलाऐं। चार दिनों के बाद कपड़े से छानकर संग्रह करें। इस घोल को सिंचाई के पानी के साथ फसल में डालें।

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