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भ्रष्टाचार के आरोपियों पर एसीबी की सख्ती, बहाली और पोस्टिंग नियमों में बदलाव की तैयारी

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चंडीगढ़। हरियाणा में भ्रष्टाचार के मामलों पर शिकंजा कसने की दिशा में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ा कदम उठाया है। रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए और बाद में जमानत पर बाहर आए सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ सख्त नीति अपनाने की तैयारी की जा रही है। एसीबी ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को सुझाव दिया है कि भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार कर्मचारियों को दोबारा सेवा में बहाल करने से बचा जाए। यदि जांच लंबित रहने के दौरान उनकी बहाली आवश्यक हो तो उन्हें पुराने कार्यस्थल पर तैनात न कर कम से कम 100 किलोमीटर दूर किसी अन्य जिले में नियुक्त किया जाए।

सूत्रों के अनुसार एसीबी ने ऐसे करीब 35 अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची सरकार को सौंपी है, जो भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई का सामना करने के बावजूद दोबारा उसी जिले या क्षेत्र में कार्यरत हैं। ब्यूरो का मानना है कि ऐसी तैनातियां जांच की निष्पक्षता और प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर सकती हैं। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने भी इस स्थिति पर नाराजगी जताई है और संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

एसीबी अधिकारियों का कहना है कि विभिन्न विभागों में ऐसे कई कर्मचारी और अधिकारी अभी भी कार्यरत हैं, जो पहले रिश्वतखोरी के मामलों में पकड़े जा चुके हैं। बावजूद इसके, उनके कार्य करने के तरीके में कोई खास बदलाव नहीं आया है। इसी को देखते हुए ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की विस्तृत सूची तैयार की गई है, ताकि उनके खिलाफ नियमानुसार कदम उठाए जा सकें।

इस बीच फरीदाबाद नगर निगम में कथित वित्तीय अनियमितताओं और घोटालों को लेकर भी जांच तेज कर दी गई है। केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद एसीबी ने निगम में पिछले छह वर्षों के दौरान हुए कार्यों और खर्चों की जांच शुरू कर दी है। इसके अलावा करीब 200 करोड़ रुपये के चर्चित घोटाले की जांच में भी तेजी लाई गई है। एसीबी ने मामले में कई अधिकारियों से पूछताछ के लिए आवश्यक अनुमति मांगी है।

पंचकूला नगर निगम के बैंक घोटाले की जांच भी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। एसीबी का दावा है कि इस मामले में अभी और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। जांच एजेंसियों को ऐसे संकेत मिले हैं कि घोटाले में कुछ अन्य कर्मचारी और बिचौलिए भी शामिल हो सकते हैं। मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी सक्रिय है और कई आरोपियों से पूछताछ की जा चुकी है।

जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर अधिकारियों का मानना है कि नगर निगम से जुड़े कुछ कर्मचारियों के खातों में भी संदिग्ध लेनदेन हुए हैं। इन पहलुओं की गहन पड़ताल की जा रही है। एसीबी का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाएगी और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

 

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