चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने प्रदेश को गड्ढा मुक्त बनाने के अभियान में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ‘म्हारी सड़क’ एप की मासिक समीक्षा बैठक के दौरान सात जिलों में शिकायतों के समाधान में कोताही पाए जाने पर 12 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
बैठक में सामने आया कि भिवानी, हिसार, फतेहाबाद, रोहतक, गुरुग्राम, करनाल और पानीपत जिलों में कई शिकायतों को हल करने के बजाय विभागों ने उन्हें अपने क्षेत्राधिकार से बाहर बताकर एक-दूसरे के पास ट्रांसफर किया। मुख्यमंत्री ने इस कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड (डीएलपी) के तहत यदि कोई ठेकेदार या एजेंसी सड़क मरम्मत का कार्य तय समय में पूरा नहीं करती है तो उसकी बैंक गारंटी जब्त की जाए। साथ ही सड़क निर्माण और मरम्मत से जुड़े टेंडरों में होने वाली देरी को रोकने के लिए बिड सबमिशन प्रक्रिया 10 दिनों के भीतर पूरी करने के आदेश भी दिए गए।
समीक्षा बैठक में बताया गया कि अब तक प्रदेश में 63,389 किलोमीटर लंबाई वाली कुल 1,43,065 सड़कों की मैपिंग की जा चुकी है, जबकि 31,939 शिकायतों का समाधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने एग्रीगेटर कंपनियों से जुड़े टैक्सी चालकों और आरटीओ कार्यालयों में टैक्सी पासिंग के लिए आने वाले ड्राइवरों के मोबाइल फोन में भी ‘म्हारी सड़क’ एप डाउनलोड कराने के निर्देश दिए, ताकि सड़कों की वास्तविक स्थिति सरकार तक सीधे पहुंच सके।
मुख्यमंत्री ने हरियाणा के अंतरराज्यीय बॉर्डर क्षेत्रों की सड़कों की विशेष निगरानी, मरम्मत और निर्माण कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, पीडब्ल्यूडी (बीएंडआर) विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ए.के. सिंह और विकास एवं पंचायत विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजेंद्र कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।







