चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने दोहलीदारों, बुटीमारों, भोंडेदारों और मुकररीदारों को दान में मिली जमीन का मालिकाना हक देने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए अहम फैसला लिया है। अब पात्र परिवारों को जमीन का मालिकाना हक हासिल करने के लिए जिला उपायुक्त कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। राज्य सरकार ने यह अधिकार उपमंडल अधिकारी नागरिक (एसडीएम) को सौंप दिया है।
सरकार के इस फैसले से उन परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो पिछले 20 वर्षों से संबंधित जमीन पर काबिज हैं। अब पात्र लोग मालिकाना हक के लिए अपने क्षेत्र के एसडीएम के समक्ष आवेदन कर सकेंगे। इससे जमीन से जुड़े मामलों के निपटारे में तेजी आने और प्रशासनिक स्तर पर लंबित मामलों का बोझ कम होने की संभावना है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त राजस्व एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। नए प्रावधान के तहत राज्य सरकार द्वारा राजस्व कानूनों के अंतर्गत प्रथम श्रेणी के सहायक कलेक्टर के रूप में अधिसूचित एसडीएम इन आवेदनों पर कार्रवाई कर सकेंगे।
मालिकाना हक मिलने के बाद संबंधित परिवार जमीन को आगे बेच भी सकेंगे। इससे पहले इस श्रेणी की जमीन की खरीद-फरोख्त पर प्रतिबंध था और उस पर खेती करने की अनुमति ही थी। सरकार के नए फैसले से पात्र लाभार्थियों को जमीन पर कानूनी अधिकार मिलने का रास्ता आसान होगा।
दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व वाली सरकार के पहले कार्यकाल में इन श्रेणियों की जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने के नियम बनाए गए थे। बाद में 11 दिसंबर 2022 को करनाल में आयोजित भगवान परशुराम महाकुंभ में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दोहलीदारों को लगभग 1,700 एकड़ जमीन का मालिकाना हक दिलाने की घोषणा की थी। अब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली सरकार ने इस दिशा में प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है।
पुराने समय में गरीब ब्राह्मणों, पुजारियों और पुरोहितों को खेती करने के लिए जमीन दान में दी जाती थी। ऐसी जमीन पर उनका मालिकाना हक नहीं होता था, लेकिन वे खेती से होने वाली आय का उपयोग कर सकते थे। बुटीमार, भोंडेदार और मुकररीदार भी जमीन से जुड़े ऐसे ही अधिकारों वाली श्रेणियों में आते हैं।
सरकार ने यह बदलाव इसलिए किया है, क्योंकि जिला उपायुक्तों के कार्यालयों में काम का बोझ अधिक होने के कारण ऐसे मामलों के निपटारे में देरी हो रही थी। अब एसडीएम स्तर पर आवेदन स्वीकार किए जाने से पात्र परिवारों को राहत मिलने और लंबित मामलों के जल्द समाधान में मदद मिलने की उम्मीद है।







