कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र में इंसानी रिश्तों को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। 71 वर्षीय जुगल किशोर की मौत के बाद उनकी छोटी बहन अंतिम संस्कार में शामिल हुए बिना अस्पताल से चली गई। बहन ने आश्रम संचालक से भाई का अंतिम संस्कार करने और अस्थियों का विसर्जन करने का आग्रह किया। इसके बाद आश्रम कमेटी ने ही जुगल किशोर का अंतिम संस्कार किया और उनकी अस्थियां सरस्वती नदी में प्रवाहित कीं।
पिहोवा के नेशनल हाईवे-152डी के पास स्थित आश्रम की देखरेख कर रहे बाबा निशान सिंह के अनुसार, जुगल किशोर मूल रूप से दिल्ली के उत्तम नगर के रहने वाले थे और करीब 10 वर्षों से पिहोवा के सरस्वती तीर्थ में रह रहे थे। उनकी शादी नहीं हुई थी। परिवार में उनकी छोटी बहन पुष्पा रानी के बारे में ही जानकारी थी। जुगल अक्सर अपनी बहन से मिलने दिल्ली जाया करते थे।
करीब दो सप्ताह पहले जुगल किशोर की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद आश्रम के लोग उन्हें इलाज के लिए पिहोवा के सरकारी अस्पताल में लेकर गए। कई दिनों तक उपचार चलने के बाद उनकी हालत को देखते हुए उन्हें कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल रेफर कर दिया गया। इस दौरान आश्रम की ओर से उनकी बहन से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन शुरुआत में संपर्क नहीं हो सका।
बाबा निशान सिंह ने बताया कि काफी प्रयास के बाद पुष्पा रानी से संपर्क हुआ और उन्हें भाई की गंभीर हालत की जानकारी देकर अस्पताल बुलाया गया। हालांकि, वह लगातार आने में देरी करती रहीं। इलाज के दौरान जुगल किशोर की मौत हो गई। इसके बाद बहन को सूचना दी गई तो वह किसी तरह कुरुक्षेत्र के अस्पताल पहुंचीं और भाई के शव को देखा।
अंतिम संस्कार को लेकर जब आश्रम संचालक ने पुष्पा से बातचीत की तो उन्होंने इसमें शामिल होने में असमर्थता जताई। उनका कहना था कि उनके पास समय नहीं है और उनकी तबीयत भी ठीक नहीं है। उन्होंने आश्रम संचालक से ही भाई का अंतिम संस्कार करने की अपील की। अस्थियों के विसर्जन को लेकर भी उन्होंने अपनी असमर्थता जताई और यह जिम्मेदारी भी आश्रम कमेटी को सौंप दी।
इसके बाद पुष्पा अपने एक रिश्तेदार के साथ अस्पताल से चली गईं। जुगल किशोर के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी आश्रम कमेटी ने संभाली। शव को पिहोवा लाकर विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया गया। मंगलवार को उनकी अस्थियों को सरस्वती नदी में प्रवाहित किया गया।
बाबा निशान सिंह ने कहा कि जुगल किशोर के अंतिम समय में परिवार की ओर से इस तरह की दूरी बनाए रखना बेहद दुखद रहा। आश्रम कमेटी ने मानवता के नाते अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई। घटना ने पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक जिम्मेदारियों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।







