पुलिस के अनुसार, 29 और 30 जुलाई की रात खेड़की दौला थाना क्षेत्र स्थित सेक्टर-86 की अंसल हाइट्स सोसायटी में विवाद की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंची पुलिस को शिकायतकर्ता ने बताया कि वह अपने दोस्तों के साथ फ्लैट में मौजूद था। इसी दौरान एक महिला अपने साथियों के साथ फ्लैट में जबरन दाखिल हुई और सभी ने खुद को दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम का सदस्य बताते हुए छापेमारी का दावा किया।
आरोप है कि नकली पुलिस टीम बनकर पहुंचे लोगों ने फ्लैट में मौजूद युवकों को बंधक बना लिया और उनके साथ मारपीट की। इसके बाद उन्हें अवैध गतिविधियों में फंसाने और केस दर्ज कराने की धमकी देकर 25 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई। आरोपियों ने माहौल ऐसा बनाया कि पीड़ित और उसके साथी डर गए।
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह का मुख्य आरोपी ऋषि, शिकायतकर्ता के एक दोस्त सागर को पैसे की व्यवस्था कराने के बहाने अपनी कार में बैठाकर ले गया। इसी दौरान सागर को आरोपियों की नीयत पर शक हुआ और उसने अपने साथियों को लाइव लोकेशन भेज दी। लोकेशन मिलने के बाद उसके साथी मौके पर पहुंचे और चार आरोपियों को पकड़ लिया, जबकि ऋषि मौके से कार लेकर फरार हो गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रोहतक निवासी सतविंद्र (46), टीनू (42), नवीन (40) और स्नेहा उर्फ सना (21) के रूप में हुई है। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि फरार आरोपी ऋषि ने पहले शिकायतकर्ता की आर्थिक स्थिति की जानकारी जुटाई थी। उसे पता था कि पीड़ित संपन्न परिवार से संबंध रखता है, जिसके बाद पूरे गिरोह ने फर्जी पुलिस टीम बनाकर रंगदारी वसूलने की साजिश रची।
जांच में यह भी सामने आया कि महिला आरोपी ने फ्लैट की घंटी बजाकर दरवाजा खुलवाया था। जैसे ही दरवाजा खुला, बाकी आरोपी अंदर घुस गए और खुद को पुलिस अधिकारी बताकर कार्रवाई शुरू कर दी। तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से दिल्ली पुलिस के तीन फर्जी पहचान पत्र बरामद हुए हैं। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि ये नकली आईडी कार्ड उन्हें ऋषि ने उपलब्ध कराए थे।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश किया। अदालत ने महिला आरोपी स्नेहा उर्फ सना को न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि अन्य तीन आरोपियों को चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। गुरुग्राम पुलिस अब फरार आरोपी ऋषि, फर्जी पहचान पत्र तैयार करने वाले लोगों और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह संपन्न लोगों को निशाना बनाकर खुद को पुलिस अधिकारी बताता था और भय का माहौल बनाकर मोटी रकम वसूलने की कोशिश करता था। मामले की जांच जारी है और जल्द ही फरार आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।







