चंडीगढ़। हरियाणा सरकार के बिजली विभाग में बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) ने 13 कार्यकारी अभियंताओं (एक्सईएन) को पदोन्नत कर अधीक्षण अभियंता (एसई) बनाया है। हिसार मुख्यालय से जारी आदेशों के अनुसार सभी अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। यह आदेश प्रबंध निदेशक की मंजूरी के बाद तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।
इस प्रशासनिक बदलाव का सबसे अधिक प्रभाव हिसार सर्किल में देखने को मिला है, जहां कई अधिकारियों को पदोन्नति के साथ महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। वहीं कुछ अधिकारियों की नई नियुक्ति भी हिसार मुख्यालय में की गई है। पदोन्नत अधिकारियों को पे मैट्रिक्स लेवल-14 के तहत अधीक्षण अभियंता बनाया गया है। सभी अधिकारी एक वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर रहेंगे और उन्हें निर्धारित समय के भीतर अपने नए पद का कार्यभार संभालना होगा।
डीएचबीवीएन की ओर से जारी आदेश के अनुसार विजय पाल को रेवाड़ी, प्रवीण यादव को गुरुग्राम, अमित कम्बोज को फरीदाबाद, आशुतोष कुमार पांचाल को सिरसा और जितेंद्र सिंह धुल को भिवानी में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित होने के कारण दिनेश शर्मा और शमशेर सिंह की पदोन्नति फिलहाल रोक दी गई है।
निगम ने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी सौंपी हैं। विजेंद्र सिंह, जो वर्तमान में एसई/सीबीओ हिसार हैं, उन्हें एसई-आरएपीडीआरपी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। अविनाश यादव को एसई (सिविल), हिसार का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। वहीं विकास कादियान पंचकूला स्थित एचईपीसी में अपनी मौजूदा जिम्मेदारी के साथ-साथ एसई (आईटी), हिसार का कार्य भी संभालेंगे।
डीएचबीवीएन के प्रबंध निदेशक विक्रम सिंह ने कहा कि निगम के प्रशासनिक ढांचे को अधिक प्रभावी और मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह फेरबदल किया गया है। उन्होंने सभी पदोन्नत अधिकारियों को एक माह के भीतर नई तैनाती पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्यभार नहीं संभालने वाले अधिकारियों की पदोन्नति स्वतः निरस्त मानी जाएगी।
निगम प्रबंधन का मानना है कि इन पदोन्नतियों, स्थानांतरणों और अतिरिक्त जिम्मेदारियों से विभिन्न परियोजनाओं एवं परिचालन सर्किलों में प्रशासनिक दक्षता, जवाबदेही और कार्य समन्वय में सुधार होगा। इससे बिजली वितरण व्यवस्था और मजबूत होगी तथा उपभोक्ताओं को अधिक गुणवत्तापूर्ण, विश्वसनीय और निर्बाध विद्युत सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।







