बलिंदर कुमार, कैथल | नीट पेपर लीक विवाद और छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में शुक्रवार को कैथल में विभिन्न छात्र, किसान, वामपंथी और अंबेडकरवादी संगठनों ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने जवाहर पार्क और हनुमान वाटिका से मार्च निकालते हुए लघु सचिवालय पहुंचकर जिला उपायुक्त अपराजिता को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ नारेबाजी भी की गई।
प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने आरोप लगाया कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों से लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं और युवाओं में निराशा बढ़ रही है। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे संगठन के प्रतिनिधियों ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ लाठीचार्ज और कानूनी कार्रवाई अनुचित थी। उनका आरोप था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के साथ सख्ती बरती गई, जबकि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि जब तक इस मामले में जवाबदेही तय नहीं की जाती और छात्रों की मांगों पर उचित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय सरकार को शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान “जब-जब मोदी डरता है, पुलिस को आगे करता है” सहित कई नारे लगाए गए। विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं ने देशभर के छात्रों का भरोसा कमजोर किया है और सरकार को इस विषय पर स्पष्ट नीति अपनानी चाहिए।
प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। ज्ञापन सौंपने के बाद प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।







