चंडीगढ़| सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए हरियाणा सरकार ने जर्जर और असुरक्षित भवनों को लेकर अहम निर्णय लिया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने वर्ष 2011 की व्यवस्था में संशोधन करते हुए जिला स्तरीय समिति का पुनर्गठन किया है। नई व्यवस्था के तहत अब जिला स्तर पर ही स्कूल भवनों की स्थिति का आकलन कर असुरक्षित कमरों को कंडम घोषित किया जा सकेगा। साथ ही उनसे प्राप्त होने वाली सामग्री की नीलामी भी समिति स्वयं करा सकेगी।
स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव की ओर से जारी आदेश के अनुसार इस फैसले का उद्देश्य जर्जर भवनों को हटाने की प्रक्रिया में होने वाली देरी को समाप्त करना और विद्यार्थियों व स्कूल स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अब ऐसे मामलों में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय या प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय से अलग से मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे निर्णय प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज होगी।
नई व्यवस्था के तहत गठित जिला स्तरीय समिति की अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) करेंगे। समिति में सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए), लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), जनस्वास्थ्य विभाग अथवा हरियाणा सरकार के किसी अन्य सिविल विभाग के कार्यकारी अभियंता, संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी, जिला प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी और संबंधित विद्यालय के प्रधान को सदस्य बनाया गया है।
समिति स्कूल भवनों का तकनीकी और सुरक्षा मानकों के आधार पर निरीक्षण करेगी। यदि कोई भवन या कमरा छात्रों और कर्मचारियों के लिए असुरक्षित पाया जाता है, तो उसे कंडम घोषित करने का निर्णय जिला स्तर पर ही लिया जा सकेगा। इसके अलावा भवन से निकलने वाली सामग्री का मूल्यांकन, नीलामी की दर तय करना और पूरी नीलामी प्रक्रिया संपन्न कराने का अधिकार भी समिति को सौंपा गया है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भवनों को कंडम घोषित करने के प्रस्ताव अब स्वीकृति के लिए निदेशालय नहीं भेजे जाएंगे। हालांकि जिन भवनों को हटाने के बाद नए कमरों के निर्माण की आवश्यकता होगी, उनकी जानकारी संबंधित निदेशालय को समय पर भेजनी होगी, ताकि नए निर्माण के लिए बजट आवंटन की प्रक्रिया प्रभावित न हो।
शिक्षा विभाग का मानना है कि इस निर्णय से लंबे समय से लंबित जर्जर स्कूल भवनों के मामलों का जल्द निपटारा हो सकेगा। साथ ही नए कमरों के निर्माण की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ेगी और विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
विभाग ने इस संबंध में जारी आदेश की प्रतियां सभी उपायुक्तों, अतिरिक्त उपायुक्तों, जिला शिक्षा अधिकारियों, जिला प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों, संबंधित इंजीनियरिंग विभागों तथा हरियाणा शिक्षा परियोजना परिषद को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी धर्मेंद्र चौधरी ने बताया कि भवनों की तकनीकी स्थिति का आकलन पीडब्ल्यूडी विभाग करेगा, जबकि जिला स्तरीय समिति की अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त करेंगे। समिति की सिफारिशों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।







