गुरुग्राम | पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक के खिलाफ सख्त व्यवस्था की मांग को लेकर अनशन पर बैठे इंजीनियर एवं समाजसेवी सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचकर उन्हें जूस पिलाया, जिसके बाद 26 दिनों से जारी अनशन खत्म हो गया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह भी उनके साथ मौजूद रहे।
जानकारी के अनुसार, देर रात करीब 11:15 बजे जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह मेदांता अस्पताल पहुंचे। दोनों नेताओं ने आईसीयू में भर्ती सोनम वांगचुक से मुलाकात की और उनकी मांगों पर विस्तार से चर्चा की। मुलाकात के दौरान डॉक्टरों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी भी ली गई। इस मौके पर सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि समेत परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे। मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आया है, जिसमें केंद्रीय मंत्री उन्हें जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराते दिखाई दे रहे हैं।
अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी विवाद या समस्या का सबसे प्रभावी समाधान संवाद के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेगी।
मुलाकात के दौरान केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने आश्वासन दिया कि सरकार जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों और 20 जुलाई को संसद मार्च में शामिल छात्रों एवं कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इसके अलावा, नीट पेपर लीक विवाद से प्रभावित छात्रों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने की संभावना पर भी सरकार गंभीरता से विचार कर रही है।
जेपी नड्डा ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार पहले से ही संसद में पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कानून और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों को लेकर चर्चा कर रही है। उनका कहना था कि देश में पारदर्शी और विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था स्थापित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक द्वारा अनशन समाप्त करने का फैसला सकारात्मक संवाद का परिणाम है। सरकार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।







