राकेश कुमार शर्मा, करनाल। हरियाणा के करनाल पहुंचे किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने मौजूदा राजनीति और केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि देश की जनता अब पारंपरिक राजनीतिक दलों से निराश हो चुकी है और नया विकल्प तलाश रही है। “कॉकरोच जनता पार्टी” को लेकर चल रही चर्चा पर उन्होंने खुलकर समर्थन जताते हुए कहा कि जनता व्यवस्था परिवर्तन चाहती है।
चढूनी ने आरोप लगाया कि आज राजनीति पूरी तरह कारोबार बन चुकी है, जहां पैसे से सत्ता हासिल की जाती है और सत्ता के जरिए पैसा कमाया जाता है। उन्होंने कहा कि आम आदमी महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट से जूझ रहा है, जबकि राजनीतिक दल जनता की मूल समस्याओं से दूर हो चुके हैं।
उन्होंने देश की आर्थिक स्थिति को चिंताजनक बताते हुए कहा कि भुखमरी और बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है। उनके मुताबिक आम लोगों का जीवन मुश्किल होता जा रहा है और यदि हालात नहीं बदले तो आने वाले समय में देश को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
कंप्यूटर शिक्षकों का मुद्दा उठाते हुए चढूनी ने कहा कि कई शिक्षक अपनी समस्याएं लेकर उनके पास पहुंचे थे। उन्होंने दावा किया कि कंप्यूटर शिक्षक पिछले 15 वर्षों से मात्र 12 हजार रुपये मासिक वेतन पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक 12-12 घंटे ड्यूटी देने के बावजूद शिक्षकों को न्यूनतम मजदूरी तक नहीं मिल रही, जो शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंताजनक स्थिति है।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी किसान नेता ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि आज इलाज इतना महंगा हो चुका है कि गरीब और मध्यम वर्ग के लोग इलाज कराने से पहले कई बार सोचने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि मामूली चोट या हड्डी टूटने पर भी लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं, जबकि आम लोगों की आय में कोई बढ़ोतरी नहीं हो रही।
“कॉकरोच जनता पार्टी” के सवाल पर चढूनी ने कहा कि वह इस नई राजनीतिक मुहिम के साथ पूरी तरह जुड़े हुए हैं और उन्हें इसका राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया है। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर करवाई गई वोटिंग में उन्हें सबसे अधिक समर्थन मिला। हालांकि उन्होंने साफ किया कि अभी पार्टी का आधिकारिक रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है और फिलहाल यह अभियान ऑनलाइन स्तर पर लोगों की राय जानने के लिए चलाया जा रहा है।
उन्होंने बड़े पूंजीपतियों को मिलने वाली राहत पर भी सवाल उठाए। चढूनी ने कहा कि करोड़ों लोग दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि बड़े उद्योगपतियों के हजारों करोड़ रुपये के कर्ज माफ किए जा रहे हैं। उन्होंने पूछा कि क्या देश सिर्फ पूंजीपतियों के लिए ही चलाया जा रहा है।
चढूनी ने कहा कि यदि यह नई राजनीतिक मुहिम आगे बढ़ती है तो इसे किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि पूरे देश में संगठन तैयार कर चुनाव लड़ना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि बुद्धिजीवियों, क्रांतिकारियों और देशहित में काम करने वाले लोगों को एक मंच पर लाकर मजबूत राजनीतिक विकल्प तैयार किया जाए।
पाम ऑयल के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सरकार को विदेशी तेल आयात कम कर सरसों के तेल को बढ़ावा देना चाहिए। उनके अनुसार बड़े पैमाने पर पाम ऑयल आयात होने से देश का पैसा विदेश जा रहा है और लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।







