सोनीपत | सोनीपत में पटवारी राजेंद्र की सेवानिवृत्ति का तरीका बेहद अनोखा रहा। आमतौर पर कर्मचारी अपने विभाग से सेवानिवृत्त होने पर ढोल-नगाड़ों के बीच परिवार और सहकर्मियों के साथ घर लौटते हैं। लेकिन इस बार राजेंद्र की विदाई उस समय हुई जब उनके साथियों ने सरकार के खिलाफ लघु सचिवालय में धरना प्रदर्शन किया था। यही वजह है कि यह विदाई कई लोगों के लिए ऐतिहासिक और चौंकाने वाली साबित हुई।
दरअसल, हरियाणा सरकार ने मानसून सत्र के दौरान फसल खराब होने पर मुआवजे की घोषणा की थी। लेकिन छह पटवारियों को इस फैसले के चलते सस्पेंड कर दिया गया क्योंकि उन्होंने एक ही फोटो को छह अलग-अलग जमीन पोर्टल पर अपलोड कर दिया था, जिससे खामी उजागर हुई। इस घटना के बाद पटवारी संगठन ने सरकार के खिलाफ चेतावनी जारी की और प्रदर्शन का निर्णय लिया।
राजेंद्र ने अपने सेवा जीवन का अंतिम दिन भी अपने साथी कर्मचारियों के बीच धरने स्थल पर बिताया। उनका कहना था कि कर्मचारी संगठन की रीढ़ की हड्डी है और वे अपने साथियों के साथ खड़े रहकर उनकी मांगों को सरकार के सामने रखते रहना चाहते हैं। उनके साथियों ने इस मौके को ऐतिहासिक बताया और विदाई कार्यक्रम में चार चांद लगाने की पूरी कोशिश की।
इस अनोखी विदाई ने यह संदेश भी दिया कि सेवाकाल का अंत होने के बाद भी कर्मचारी अपने संगठन और साथियों के साथ खड़े रह सकते हैं। राजेंद्र का यह कदम उनके सहकर्मियों और पटवारी संगठन के लिए प्रेरणादायक साबित हुआ।







