गोहाना | अंतरराष्ट्रीय पहलवान और ओलंपिक पदक विजेता रवि दहिया ने रविवार को रिचा के साथ शादी के सात फेरे लेकर जीवन की नई शुरुआत की। यह शादी अत्यंत सादगी और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सम्पन्न हुई, जिसमें दहेज और महंगे उपहारों का प्रयोग नहीं किया गया। इस कदम के जरिए दहिया और उनके परिवार ने समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया कि विवाह में दहेज नहीं, प्रेम और सम्मान सबसे महत्वपूर्ण हैं।
रवि दहिया अपनी बारात लेकर नाहरी गांव से बिलबिलान पहुंचे। रिचा के पिता ने स्कूल में विवाह समारोह का आयोजन किया। रवि ने रथ पर सवार होकर पारंपरिक स्वागत स्थल तक बारात का मार्च पूरा किया। रिचा के भाई ने मंच पर लड्डू खिलाकर रस्म पूरी की, जबकि बहनों ने नीम झरना, आरता और रिबन कटवाने जैसी पारंपरिक रस्मों में भाग लिया। इस दौरान दूल्हा पक्ष ने हल्के-फुल्के मज़ाक और पारंपरिक बोलों से माहौल को खुशनुमा बनाया।
रिचा की एंट्री स्टेज पर फिल्मी हीरोइन जैसी रही। स्टाइलिश चश्मा और पारंपरिक दुल्हन के लिबास में वह बेहद खूबसूरत दिख रही थीं। वरमाला की रस्म के दौरान रवि ने अपनी अर्धांगिनी को अंगीकार किया। रिचा ने बताया कि वह वर्तमान में एमए जियोग्राफी की पढ़ाई कर रही हैं और नेट की तैयारी में लगी हैं। उन्होंने कहा कि यह विवाह उनके लिए एक सपना सच होने जैसा है और वह सरल, सादगी पसंद परिवार में शामिल होने को लेकर खुश हैं।
रवि दहिया ने कहा, “मैं अकेला ऐसा नहीं हूँ। यह परंपरा पहले भी निभाई जाती रही है। जब पिता बेटी को देता है, इससे बड़ा कोई दहेज नहीं हो सकता।” उन्होंने बिना दान-दहेज और महंगे समारोह के विवाह कर समाज को सकारात्मक संदेश दिया।
इस शादी ने न केवल ओलंपियन के जीवन की सादगी को दर्शाया, बल्कि दहेज प्रथा के खिलाफ एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत किया।







