चंडीगढ़ | हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरण कुमार का आठ पन्नों का सुसाइड नोट सामने आया है, जिसमें उन्होंने 2020 से वरिष्ठ अधिकारियों पर जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न और सार्वजनिक अपमान के गंभीर आरोप लगाए हैं। पूरण कुमार ने लिखा कि उन्होंने वर्षों तक समान व्यवहार की मांग की, लेकिन लगातार उनके साथ भेदभाव होता रहा।
सुसाइड नोट में उन्होंने पूर्व डीजीपी मनोज यादव, डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर, पूर्व आईएएस टीवीएसएन प्रसाद, एडीजीपी अमिताभ ढिल्लों, एडीजीपी संजय कुमार, आईजी पंकज नैन, आईपीएस कला रामचंद्रन, संदीप खिरवार, सिबाश कबीराज सहित कई अधिकारियों पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और झूठे मामलों में फंसाने की साजिश का आरोप लगाया है।
उन्होंने लिखा कि 2020 में अंबाला के एक मंदिर में जातिगत भेदभाव की घटना के बाद से उत्पीड़न शुरू हुआ और लगातार बढ़ता गया। उनके अनुसार, उन्हें सरकारी वाहन और आवास से वंचित किया गया, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उनकी प्रतिष्ठा धूमिल की गई और मीडिया में गोपनीय जानकारी लीक की गई।
फाइनल नोट में पूरण कुमार ने तत्कालीन गृह सचिव राजीव अरोड़ा पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने अर्जित अवकाश की मंजूरी नहीं दी, जिसके कारण वे अपने पिता के अंतिम समय में उनसे नहीं मिल सके। उन्होंने इसे अपने जीवन की सबसे बड़ी पीड़ा बताया।
सुसाइड नोट में डीजीपी शत्रुजीत कपूर पर यह भी आरोप लगाया गया कि उन्होंने उनके खिलाफ अन्य अधिकारियों को उकसाया और एसपी रोहतक नरेंद्र बिजारणिया के माध्यम से उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की। पूरण कुमार ने लिखा कि अब उन्हें अपने परिवार की सुरक्षा की चिंता है और वे चाहते हैं कि किसी ईमानदार अधिकारी के साथ उनके जैसा व्यवहार न दोहराया जाए।
उन्होंने अपने नोट में यह भी कहा कि 13 मार्च 2025 को उन्हें सूचना मिली थी कि उनके मामलों की जांच विचाराधीन है, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनके अनुसार, उन्होंने बार-बार समान अवसर, आवास, वाहन और कैडर प्रबंधन के मामलों में शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन हर बार उन्हें नज़रअंदाज़ किया गया।
पूरण कुमार ने अंत में लिखा कि उनकी सभी शिकायतें, पत्र और सबूत दर्शाते हैं कि उन्हें वर्षों से सुनियोजित तरीके से मानसिक और जातिगत उत्पीड़न का शिकार बनाया गया। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी मौत के बाद सच्चाई सामने आएगी और न्याय मिलेगा।







