सोनीपत/गाजियाबाद | गाजियाबाद के ट्रोनिका सिटी थाना क्षेत्र में बुधवार शाम हुई पुलिस मुठभेड़ में मारे गए सोनीपत निवासी अरुण के घर में मातम पसरा हुआ है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि अरुण निर्दोष था और उसकी मौत फर्जी एनकाउंटर में की गई।
परिवार का दर्द
मसूर विहार कॉलोनी, सोनीपत निवासी अरुण के पिता राजेंद्र सिंह और मां सविता का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों के अनुसार, बुधवार दोपहर 3 बजे अरुण दोस्तों के साथ हरिद्वार जाने की बात कहकर निकला था और अगले दिन सुबह घर लौटने वाला था।
परिवार ने दावा किया कि अरुण किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं था। वह पिछले पांच साल से शुगर का मरीज था और गंभीर रूप से बीमार रहता था। कई बार उसका शुगर लेवल 700-800 तक पहुंच जाता था, जिसके चलते वह नियमित नौकरी या फैक्ट्री में काम करने में सक्षम नहीं था।
परिजनों ने यह भी बताया कि हाल ही में परिवार ने 10-12 लाख रुपये का कर्ज लेकर नया मकान बनाया है, जिसके लिए गांव का पुराना घर और मवेशी बेचने पड़े। यहां तक कि बेटियों के गहने भी गिरवी रखे गए।
पुलिस का दावा
पुलिस के अनुसार, एनकाउंटर के दौरान अरुण और उसके साथी रविंद्र ने अवैध पिस्टल से फायरिंग की, जिस पर जवाबी कार्रवाई की गई। दोनों गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
पुलिस ने मौके से अवैध हथियार बरामद करने का दावा किया और बताया कि एसटीएफ की सरकारी गाड़ी पर भी गोलियां चलाई गईं।
इस कार्रवाई में दिल्ली पुलिस, यूपी एसओजी और सोनीपत एसटीएफ की संयुक्त टीम शामिल थी। दिल्ली पुलिस से एसीपी धर्मेंद्र सिंह और एसआई मंजीत सिंह, सोनीपत एसटीएफ प्रभारी इंस्पेक्टर योगेंद्र कुमार और यूपी एसओजी प्रभारी अक्षय त्यागी अपनी टीमों के साथ मौजूद थे।







