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हरियाणा: चर्चित IAS अधिकारी अशोक खेमका सेवानिवृत्त, सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर मांगी माफ़ी

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हरियाणा ।हरियाणा के चर्चित और चर्चाओं में रहने वाले वरिष्ठ IAS अधिकारी डॉ. अशोक खेमका बुधवार को प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त हो गए। अपने 34 साल के सेवाकाल में 57 तबादलों का सामना कर चुके खेमका ने रिटायरमेंट के दिन एक भावुक पोस्ट सोशल मीडिया पर साझा की, जो तेजी से वायरल हो रही है।

खेमका ने लिखा, “आज मेरा आईएएस करियर पूर्ण हुआ। इस लंबे सफर में साथ देने वाले परिवार, सहयोगियों और शुभचिंतकों का आभार व्यक्त करता हूं। अगर मेरी वजह से किसी को दुख पहुंचा हो, तो मैं क्षमा चाहता हूं।”

राजनीतिक परिवेश में भी चर्चित रहे

भले ही बीजेपी सरकार के दौरान खेमका को अधिकतर समय हाशिए पर रखा गया, लेकिन हाल ही में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में बनी सरकार में उन्हें परिवहन विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। यह जिम्मेदारी उन्हें परिवहन मंत्री अनिल विज के करीबी माने जाने के कारण मिली थी, जिनके साथ उनके रिश्ते बेहतर रहे। खेमका ने यहीं से सेवा निवृत्ति ली।

शिक्षण और पेशेवर पृष्ठभूमि

डॉ. अशोक खेमका 1991 बैच के IAS अधिकारी हैं और मूल रूप से कोलकाता के निवासी हैं। उनका जन्म 30 अप्रैल, 1965 को हुआ। उन्होंने IIT खड़गपुर से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया, साथ ही टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च से पीएचडी भी पूरी की। इसके अलावा खेमका ने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन और फाइनेंस में MBA और पंजाब यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री भी प्राप्त की।

वाड्रा-डीएलएफ डील से सुर्खियों में आए

साल 2012 में खेमका ने उस समय राष्ट्रीय सुर्खियां बटोरीं, जब उन्होंने रॉबर्ट वाड्रा और DLF के बीच हुई जमीन डील के म्यूटेशन को रद्द कर दिया। इसके बाद वह कई बार अपने निर्णयों और कार्यशैली के कारण सुर्खियों में रहे। 2014 में बतौर परिवहन आयुक्त उन्होंने भारी वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया, जिससे ट्रांसपोर्टर्स में नाराजगी और हड़ताल की स्थिति बनी थी।

विवाद और जांचें

वर्ष 2023 में उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सतर्कता विभाग में तैनाती की मांग करते हुए लिखा था कि वह सेवा के अंतिम चरण में भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ना चाहते हैं। वहीं उनका आईएएस संजीव वर्मा से टकराव भी सुर्खियों में रहा, जो बाद में पुलिस और मुख्य सचिव स्तर तक पहुंचा। इस मामले में सरकार ने जांच के आदेश भी दिए थे।

डॉ. खेमका की सेवा को प्रशासनिक पारदर्शिता और ईमानदारी के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। अब देखना यह होगा कि सेवानिवृत्ति के बाद वह किस दिशा में सक्रिय रहते हैं।

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