Home Haryana कुलदीप बिश्नोई के पास आखिरी चांस…क्या निकल पायेंगे राजनैतिक गर्दिश से?

कुलदीप बिश्नोई के पास आखिरी चांस…क्या निकल पायेंगे राजनैतिक गर्दिश से?

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पलवल 6 दिसंबर ——हरियाणा में एक राज्यसभा सीट के लिए 20 दिसंबर को चुनाव होने है ऐसे में सवाल यह है कि कुलदीप बिश्नोई के लिए अपनी राजनैतिक जमीन बचाने का आखिरी मौका है क्योंकि कुलदीप बिश्नोई अब राज्यसभा सीट के लिए भाजपा के शीर्ष नेताओं के चक्कर काटते नजर आए रहें है। आपको बता दें कि कुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य बिश्नोई हाल ही में हुए विधानसभा के चुनाव में न केवल पराजित हुए बल्कि उनका करीब पांच दशक पुराना अभेद किला आदमपुर नहीं ढह गया। जिसके चलते कुलदीप बिश्नोई अब सियासी गर्दिश से गुजर रहें है। लेकिन इस सबसे अलग एक और सवाल है कि राज्यसभा की इस सीट पर कुलदीप बिश्नोई की दावेदारी कितनी मजबूत है। क्योंकि भाजपा ने अभी तक कुलदीप बिश्नोई को कोई बड़ा तोहफा तो नहीं दिया जिसकी वजह यह भी है कि भाजपा किसी नेता के परिवार के रसूख को कम ही तव्वजों देती है। वह किसी भी नेता के समर्पण और काम को ही तव्वज्जों देती है। आपको बता दें कि कुलदीप बिश्नोई को भाजपा ने राजस्थान चुनाव में प्रभारी नियुक्त किया था जिनमें करीब 37 सीटों पर बिश्नोई वोटरों का दबदबा है जिनमें से कुलदीप बिश्नोई ने 27 सीटों पर अपना दमखम दिखाया और नतीजा भी अनुकूल रहा इन 27 सीटों में से 22 सीटें भाजपा की झोली में गई और राजस्थान में भाजपा की सरकार बनाने में इन सीटों का अहम योगदान रहा। जिससे कुलदीप बिश्नोई को यह लग रहा था कि भाजपा उन्हें कोई बड़ा तोहफा देगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। क्योंकि भाजपा ने न तो लोकसभा के चुनाव में कुलदीप बिश्नोई को हिसार से टिकट दिया और न ही उनके बेटे को नायब सैनी की पहली कैबिनेट में जगह दी। जिसके बाद से वह राजनीति में हाशिए पर नजर आ रहे हैं ऐसे में कुलदीप बिश्नोई अपनी राजनीति को ट्रैक पर लाने की हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं। बिश्नोई दिल्ली दरबार में बीजेपी हाईकमान के दिग्गजों से मुलाकात कर रहे हैं। 27 नवंबर को उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की और फिर उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर ये लिखते हुए पोस्ट किया कि अमित शाह से शिष्टाचार की भेंट हुईमहाराष्ट्र में प्रचंड जीत की बधाई दी, उनसे आशीर्वाद लिया और लंबी राजनीतिक चर्चा की मुझे इतना लंबा समय देने, मेरी बातों को इतने ध्यान से सुनने और इतना स्नेह देने के लिए मेरे नेता अमित शाह का दिल की गहराइयों से आभार। आपको बता दें कि कुलदीप बिश्नोई पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के बेटे हैं और उनका राजनैतिक अनुभव भी लंबा है। अब जब अपनी पुश्तैनी सीट आदमपुर भी 57 साल के लंबे अरसे के बाद खो चुके हैं तो उनकी निगाहें कृष्ण लाल परिवार के विधानसभा चुनाव जितने के बाद खाली हुई राज्यसभा की सीट पर हैं ऐसे में भाजपा उन्हें कितनी तरजीह देती है यह तो भविष्य के गर्भ में है क्योंकि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के कार्यक्रम जो हरियाणा में हुए उनसे कुलदीप बिश्नोई कुछ दिन से दूरी बनाए बैठे थे अब उन्होंने राज्य सभा के लिए लॉबिंग शुरू कर रखी है लेकिन एक बात साफ है की कुलदीप बिश्नोई अपनी राजनैतिक जमीन को बचाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं।
अब यह तो समय है बताएगा की कुलदीप बिश्नोई का भविष्य क्या रहने वाला है क्योंकि इसी एक सीट के लिए भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेता भी रेस में है जिनमें पूर्व मंत्री बनवारी लाल, पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल, प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बडौली, संजय भाटिया, सुदेश कटारिया आदि नेता भी शामिल है। हालांकि भाजपा की ओर से इस सीट पर किसकी ताजपोशी होगी यह जल्द ही साफ है जायेगा क्योंकि दस दिसंबर नामांकन की आखिरी तारीख है उससे पहले या उसी दिन उम्मीदवार का नाम सामने आए जायेगा। लेकिन यह बात तो साफ है कि कुलदीप बिश्नोई को लंबे समय से राजनीति की गर्दिश में हैं उनके पास इस गर्दिश से निकलने का आखिरी मौका है।

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