22 नवंबर, करनाल–करनाल जिला के इंद्री खंड में जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर स्थित गांव नन्हेड़ा व इस्लाम नगर की राजकीय प्राथमिक पाठशालाओं में अध्यापक व विद्यार्थी ना केवल अपने क्षेत्र बल्कि पूरे जिले में पर्यावरण संरक्षण व प्रकृति प्रेम की अद्भुत मिसाल कायम कर रहे हैं।गांव नन्हेड़ा की प्राथमिक पाठशाला के अध्यापकों द्वारा अपने विद्यालय प्रांगण को हरित प्रांगण में बदलने के प्रयास को 2016 में प्रारंभ किया गया। आज बहूविद वर्षों की अप्रतिम छटा के कारण विद्यालय प्रांगण प्राचीन गुरुकुलो की भांति शांत और सुरमई वातावरण प्रदान कर जिले के अन्य विद्यालयों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गया है। घने वृक्षों के नीचे पंक्तिबद्ध विद्यार्थी पठन-पाठन के किताबी माहौल की बोझीलता और तनाव से मुक्त होकर व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं।
जैव विविधता से भरपूर विद्यालय प्रांगण में दिखाई दे रही प्राचीन गुरुकुल पद्धति की छटा
विद्यालय प्रांगण की इस मनोहर छटा को देखने के लिए समीप वर्ती ग्रामीणों के साथ-साथ दूसरे विद्यालयों के अध्यापक तथा प्रशासनिक अधिकारी भी यहां पहुंच रहे हैं। राजकीय प्राथमिक पाठशाला नन्हेड़ा के अध्यापक सुनील सिवाच व महिंद्र ने बताया कि प्रांगण में अध्यापकों वह ग्रामीणों के सहयोग से हजारों की संख्या में वृक्ष एवं पौधे लगाए गए हैं जिनमें रंग-बिरंगे फूलों की विभिन्न प्रजातियों के साथ फलदार औषधीय और दुर्लभ वृक्ष भी शामिल है। विद्यालय प्रांगण में जहां एक और अभिजातीय अल्फांजो आम से लेकर बारहमासी अमरफल के साथ-साथ अमरुद नींबू केला आडू शहतूत आंवला आदि के वृक्ष बहुतायत में है’ जिनके फलों का वितरण विद्यार्थियों के साथ-साथ ग्रामीणों को भी किया जाता है वहीं दूसरी और हरण बहेड़ा हरसिंगार तुलसी कपूर जैसे औषधीय वृक्ष भी यहां मौजूद है दुर्लभ प्रजाति के वृक्ष जैसे सिंदूर चंदन रिंग रुद्राक्ष सीता अशोक इत्यादि विद्यालय वाटिका के प्रमुख आकर्षण है तो काले पीले गांठदार बांस वृक्षो के साथ-साथ पहाड़ी क्षेत्रों में पाए जाने वाले चीड़, बादाम और सेब के वृक्ष भी विद्यालय प्रांगण की शोभा बढ़ा रहे हैं। इस कार्य में ग्राम वासियों का सहयोग विद्यालय के अध्यापकों का अथक प्रयास और विद्यार्थियों की पूर्ण निष्ठा इस पाठशाला को पर्यावरण संरक्षण की अद्भुत मिसाल के रूप में प्रस्तुत करती है। विद्यालय प्रांगण की हरीतिमा विविध पर्यावरण मित्र कीटों, तितलियां, मधुमक्खियां व रंग-बिरंगे पक्षियों का आश्चर्य स्थल भी बन गई है। महिंद्र अध्यापक ने बताया कि पिछले सीजन में यहां मधुमक्खी के सात छत्ते लग गए थे जिनसे हमे बिल्कुल शुद्ध शहद मिला है।
शिक्षकों के मार्गदर्शन से बच्चे लगा रहे फलदार पौधे
विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों ने बताया कि हमे स्कूल में रहना बहुत ही अच्छा लगता है। गुरु जी के मार्गदर्शन से हमने बहुत से फलदार पौधे रोपित किये है। जो पेड़ फल देने लग जाते है अध्यापकों द्वारा उन्हें विद्यालय के बच्चों में वितरित कर दिया जाता है। बच्चों ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि पेड़ों को काटना नही चाहिये इनसे हमें बहुत कुछ मिलता है।
गांव के सरपंच ने बताया कि पूर्व सरपंचों व ग्रामीणों की दी हुई सौगात को हम सब मिलकर आगे बढ़ा रहे है। उन्होंने कहा ग्रामीण घूमने के लिए शहर की तरफ जाते है,अब यहां का नजारा देखने शहर के लोग यहां आएंगे।इस विद्यालय से प्रेरणा लेकर समीपव्रती ग्राम इस्लामनगर की प्राथमिक पाठशाला भी अभिनव प्रयोग में जुट गई है। वृक्षों व पौधों को खरीदने के असमर्थता के चलते यहां के अध्यापकों ने स्वयं पौध उगाने का निश्चय किया। विद्यालय प्रांगण में लगभग 80 प्रजातियों के एक करोड़ से भी ऊपर पौधों की पौध तैयार की गई है जिन्हें विद्यालयों,संस्थाओं एवं व्यक्तियों को निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। विद्यालय के अध्यापक एवं विद्यार्थी स्वेच्छा से श्रमदान कर इन पौधों को विकसित करने व वितरण करने का कार्य कर रहे हैं। उनके प्रयासों से जिले की अन्य पाठशालाएं भी रंग-बिरंगे पुष्पों की सुवास से महक उठी है।







