चंडीगढ़ : चन्द्रिका ( TSN)- मुख्यमंत्री मनोहर लाल
खट्टर के एक लाख 80 हजार तक वार्षिक आय वाले परिवार की बेटियों को मुफ्त शिक्षा देने वाले बयान पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने निशाना साधा है । उन्होंने कहा कि शिक्षा तो सबकी फ्री होनी चाहिए, पूरी फ्री होनी चाहिए और अच्छी होनी चाहिए। इस देश में पैदा होने लगे हर बच्चे को अच्छी और मुफ्त शिक्षा का अधिकार है।
चुनाव नजदीक आते ही इनको याद आई शिक्षा
वहीं प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद डॉ. सुशील गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल की लोकप्रियता से डर गए हैं। दिल्ली में हुई शिक्षा क्रांति को देखते हुए हरियाणा के लोग भी दिल्ली जैसे स्कूलों और फ्री शिक्षा की माँग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल नौ साल में हरियाणा में शिक्षा के लिए कुछ भी नहीं कर सके, इसलिए आनन फ़ानन में शिक्षा पर चुनावी घोषणा कर रहे हैं। आज जब चुनाव में हार दिख रही है तो इनको शिक्षा याद आ रही है । उन्होंने कहा कि प्रदेश के 131 सरकारी स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा नहीं है। 236 स्कूलों में बिजली कनेक्शन ही नहीं है। 538 स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय नहीं है और 1047 स्कूलों में लड़कों के शौचालय नहीं है। इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए 8240 क्लासरूम की जरूरत है और 30,000 से ज्यादा शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं।
फ्री शिक्षा सबका अधिकार, इसे दायरे में नहीं बांधना चाहिए
वहीं सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अनुराग ढांडा ने कहा कि सीएम द्वारा बेटियों की फ्री शिक्षा को लेकर की गई घोषणा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि फ्री शिक्षा सबका अधिकार है, इसे दायरे में नहीं बांधना चाहिए।शिक्षा तो सबकी फ्री होनी चाहिए, पूरी फ्री होनी चाहिए और अच्छी होनी चाहिए। इस देश में पैदा होने वाले हर बच्चे का अच्छी शिक्षा का अधिकार है। आम आदमी पार्टी की सरकार में सबको मुफ्त शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती हैं। उन्होंने कहा कि गरीबों के बच्चे कैसे आगे बढें? उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता ने कांग्रेस को 25 और भाजपा को 9 साल दिए। इन दोनों पार्टियों ने बच्चों की शिक्षा को कभी जरूरी नहीं समझा। इन्होंने बच्चों के भविष्य को केवल अंधकार में धकेलने का काम किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार एक तरफ तो बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और खुले में शौच मुक्त भारत जैसे नारे दे रही है, वहीं दूसरी तरफ स्कूलों में शौचालय व पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं है। इन सुविधाओं के लिए स्कूली बच्चों को मजबूरन हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा है।







