चंडीगढ़ (अंकुर कपूर): हरियाणा विधानसभा बजट सत्र के दूसरे चरण के तीसरे दिन की कार्यवाही सुबह 11 बजे से शुरू हुई। इस दौरान सदन में बेरोजगारी का मुद्दा गूंजा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में प्रश्न काल के दौरान प्रदेश में बेरोजगारी से संबंधित लाए गए प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि समय-समय पर सांख्यिकीय एवं कार्यक्रम कार्यान्वय मंत्रालय द्वारा पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) करवाया जाता है।
पीएलएफएस की रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में 2017-18 में बेरोजगारी दर 8.6 प्रतिशत, 2018-19 में 9.2 प्रतिशत, 2019-20 में 6.5 प्रतिशत, 2020-21 में 6.3 प्रतिशत थी। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक भी हर साल इस प्रकार के आंकड़े जारी करता है। आरबीआई के अनुसार बेरोजगारी दर 8.1 प्रतिशत है। हालांकि, इन आंकड़े का कोई तय फार्मुला नहीं होता, इसलिए विभिन्न एजेंसियों के आंकड़े भी अलग-अलग होते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2005- 2014 तक 10 वर्षों में 86 हजार सरकारी नौकरियों दी गई। जबकि हमने 8 सालों में 1 लाख 1 हजार से अधिक नौकरियां दी।
इसके अलावा, सक्षम युवा योजना के तहत भी स्नातकोत्तर, स्नातक तथा बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को 100 घंटे काम के बदले क्रमशः 3000 रुपये, 1500 रुपये तथा 900 रुपए मासिक दिए जाते हैं। अब तक इस योजना में 1.75 लाख युवाओं ने लाभ उठाया है। इतना ही नहीं, हरियाणा कौशल विकास मिशन के तहत 1 लाख से अधिक युवाओं का कौशल विकास करके भी उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाए गए हैं। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में भी 2015 के बाद 12.64 लाख युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाया गया है।
इस संस्था के सीईओ कांग्रेस पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र के सदस्य भी हैं। साल 2017 में इस एजेंसी ने हरियाणा की बेरोजगारी दर 2 प्रतिशत दिखाई थी। इसके बाद कभी 34 तो कभी 26 प्रतिशत बताते हैं, जिसका कोई आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि परिवार पहचान पत्र के माध्यम से हर व्यक्ति का डाटा सरकार के पास है और खुद सत्यापित आंकड़ों के आधार पर प्रदेश में बेरोजगारों की संख्या 10.46 लाख है। हालांकि, समाज का एक वर्ग ऐसा होता है, जो बेरोजगार नहीं होता बल्कि वास्तव में वह अंडर एम्पलॉयिड होता है, तो वह भी आगे बढ़ने के लिए रोजगार के अन्य अवसर तलाश्ता है।







