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हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने चुनावी राजनीति में पूरे किए 33 साल 

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चंडीगढ़ (एकता): हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज के चुनावी राजनीति में 33 साल पूरे हुए। बता दें कि आज से ठीक 33 साल पहले 27 मई 1990 को तत्कालीन सातवीं हरियाणा विधानसभा की दो रिक्त सीटों के लिए हुए उपचुनाव के नतीजे घोषित किए गए थे, जिसमें अंबाला जिले के कैंट विधानसभा हलके से बीजेपी के टिकट पर अनिल कुमार (विज) पहली बार चुनाव जीतकर विधायक के तौर पर निर्वाचित हुए थे। वहीं सिरसा जिले की तत्कालीन दरबा कलां सीट से जनता दल के टिकट पर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला विजयी होकर हालांकि दूसरी बार विधायक बने थे।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि जून, 1987 में सातवीं हरियाणा विधानसभा आम चुनावों में अम्बाला कैंट विधानसभा सीट से भाजपा की वरिष्ठ नेत्री एवं दिवंगत सुषमा स्वराज विजयी होकर दूसरी बार कैंट से विधायक बनी थी, जिसके बाद वह प्रदेश में तत्कालीन देवी लाल के नेतृत्व वाली लोक दल- भाजपा गठबंधन सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बनी। उस उपचुनाव में भाजपा के टिकट पर अनिल विज ने चुनाव लड़ा था और विजयी हुए जिसमें उन्होंने कांग्रेस के राम दास धमीजा एवं निर्दलयी अर्जुन लाल कालड़ा को पराजित किया था।

एक साल बाद ही अप्रैल, 1991 में सातवीं हरियाणा विधानसभा समयपूर्व ही भंग कर दी गई थी, क्योंकि तत्कालीन मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला तत्कालीन राज्यपाल धनिक लाल मंडल के निर्देशानुसार सदन में उनकी सरकार का बहुमत साबित नहीं कर पाए थे। इसके बाद राज्यपाल की सिफारिश पर तत्कालीन केंद्र की चंद्रशेखर सरकार ने हरियाणा सरकार को अल्पमत में होने कारण बर्खास्त कर दिया था, जिसके बाद आगामी कुछ माह तक हरियाणा प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था।

साढ़े 3 साल पहले अक्तूबर, 2019 में मौजूदा 14 वीं हरियाणा विधानसभा आम चुनावों में विज लगातार तीसरी बार और कुल छठी बार अम्बाला कैंट सीट से विजयी होकर विधायक बने थे। आज से साढ़े 56 वर्ष पूर्व संयुक्त पंजाब से अलग होने के बाद जब 1 नवंबर, 1966 को हरियाणा देश का नया राज्य बना, तो प्रदेश में अब तक हुए 13 विधानसभा चुनावों में अम्बाला कैंट हलके में 7 बार भाजपा और 5 बार कांग्रेस पार्टी ने विजय हासिल की है जबकि दो बार यहाँ से निर्दलयी उम्मीदवार जीता है और दोनों बार वह निर्दलयी विज ही थे।

साल 1982 में कांग्रेस के राम दास धमीजा ने जनता पार्टी के स्वामी अग्निवेश एवं भाजपा के सोम प्रकाश को हराया। कैंट से कुल दो बार सुषमा स्वराज विधायक बनी पहले वर्ष 1977 में जनता पार्टी से और वर्ष 1987 में भाजपा के टिकट पर। साल 1991 विधानसभा आम चुनावों में कांग्रेस के बृज आनंद ने भाजपा से दूसरा चुनाव लड़ रहे अनिल विज को हरा दिया था।

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