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सोनीपत में पराली बनी किसानों की अतिरिक्त आय का जरिया, जलाने के मामले घटे

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सोनीपत। धान की कटाई के साथ खेतों से निकलने वाली पराली, जो लंबे समय से वायु प्रदूषण की बड़ी वजह मानी जाती रही है, अब किसानों के लिए अतिरिक्त आय का साधन बन रही है। धान की कटाई शुरू होते ही ठेकेदार कटर, पराली एकत्र करने वाली मशीन और बेलर लेकर खेतों में पहुंच रहे हैं। मशीनों की मदद से पराली के गट्ठर तैयार कर उन्हें खेतों से उठाकर ले जाया जा रहा है। इससे किसानों को पराली के निस्तारण की समस्या से राहत मिलने के साथ आर्थिक लाभ भी हो रहा है।

कृषि विभाग के अनुसार पराली प्रबंधन से किसान को प्रति एकड़ करीब आठ से नौ हजार रुपये तक की आय हो सकती है। इसके अलावा प्रदेश सरकार की ओर से भी किसानों को पराली प्रबंधन के लिए प्रति एकड़ 1,200 रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। खेत से फसल अवशेष हट जाने के कारण अगली फसल की बिजाई के लिए जुताई पर होने वाला खर्च भी कम हो जाता है। इस तरह पराली का प्रबंधन किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी के साथ खेती की लागत घटाने का जरिया बन रहा है।

धान कटाई का सीजन शुरू हुए करीब एक सप्ताह हो चुका है, लेकिन सोनीपत जिले में अभी तक पराली जलाने का कोई मामला सामने नहीं आया है। जिला प्रशासन और कृषि विभाग की ओर से किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। प्रशासन का प्रयास है कि पराली को आग लगाने के बजाय मशीनों के माध्यम से उसका प्रबंधन किया जाए, ताकि खेतों के साथ आसपास के क्षेत्रों और दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से रोका जा सके।

पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों में भी जिले में पराली जलाने के मामलों में लगातार कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2021 में हरसैक के माध्यम से 219 लोकेशन चिह्नित की गई थीं, जिनमें 72 स्थानों पर आग लगी मिली और सभी 72 मामलों में चालान किए गए। इन पर कुल 1.72 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। वर्ष 2022 में 94 लोकेशन में 35 जगह आग लगी मिली और 33 चालान काटे गए, जबकि 85 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। वर्ष 2023 में 78 लोकेशन में 23 आग के मामले सामने आए और 19 चालान हुए, जिन पर 47,500 रुपये जुर्माना लगाया गया। वर्ष 2024 में 70 लोकेशन में 18 आग के मामले मिले और 17 चालान काटकर 60 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। वर्ष 2025 में 68 लोकेशन में 11 जगह पराली जलती मिली और सभी 11 मामलों में चालान करते हुए 60 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया।

पराली जलाने से रोकने के लिए प्रशासन ने निगरानी भी बढ़ा दी है। जिले में हर 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। पिछले वर्ष जिन गांवों में पराली जलाने के मामले सामने आए थे, वहां निगरानी और जागरूकता के लिए 50 किसानों पर एक नोडल अधिकारी लगाया गया है। ये अधिकारी किसानों से संपर्क कर उन्हें फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के लिए प्रेरित करने के साथ खेतों की निगरानी भी करेंगे।

पराली जलाते हुए पकड़े जाने पर किसान के खिलाफ एफआईआर और जुर्माने की कार्रवाई की जाती है। इसके अलावा संबंधित किसान को मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है, जिससे उसे अनाज मंडी में अपनी फसल बेचने में परेशानी होती है। प्रशासन की ओर से धान कटाई में इस्तेमाल होने वाली कंबाइन हार्वेस्टर मशीनों में सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) लगाना भी अनिवार्य किया गया है। यह उपकरण धान की कटाई के दौरान निकलने वाले अवशेषों को बारीक काटकर खेत में फैलाने में मदद करता है। बिना एसएमएस के चलने वाली कंबाइन मशीनों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

कृषि विभाग के एएई नवीन हुड्डा के अनुसार, जिले में कई वर्षों से पराली जलाने के मामलों में कमी आ रही है। उन्होंने कहा कि यह प्रशासन की सख्ती और किसानों में बढ़ती जागरूकता का परिणाम है। किसानों को लगातार पराली न जलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उनके अनुसार पराली के उचित प्रबंधन से किसानों को प्रति एकड़ नौ हजार रुपये से अधिक तक की नकद आय हो सकती है और अगली फसल की जुताई में भी सैकड़ों रुपये की बचत होती है।

पिछले वर्ष जिन गांवों में पराली जलाने के मामले सामने आए थे, उनमें घड़वाल, कथूरा, निजामपुर, भंडेरी, भावड़, छपरा, धनाना, बिधलान, बुटाना कुंडू, ईशापुर खेड़ी, जाजी, कटवाल, रिवाड़ा, खानपुर कलां, खेड़ी दमकन और बली शामिल हैं। इन गांवों में इस सीजन प्रशासन की निगरानी और जागरूकता गतिविधियों को विशेष रूप से बढ़ाया गया है।

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