राकेश कुमार शर्मा|करनाल-:करनाल पहुंचे योगगुरु बाबा रामदेव ने रविवार को शिक्षा व्यवस्था,भारतीय संस्कृति,चुनाव प्रणाली और देश में चल रहे विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। गुरुकुल में नए भवनों के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल हुए बाबा रामदेव ने कहा कि देश को शिक्षा,चिकित्सा,भाषा और वैचारिक गुलामी से बाहर निकालने की जरूरत है।उन्होंने समान शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ देश में एक साथ चुनाव कराने की भी जोरदार वकालत की।बाबा रामदेव ने कहा कि शिक्षा किसी भी देश के भविष्य की सबसे मजबूत नींव होती है।इसलिए शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें भारतीय संस्कारों और संस्कृति के साथ आधुनिक विज्ञान और तकनीक का भी समावेश हो। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को संस्कृत, हिंदी, भारतीय इतिहास और संस्कृति की जानकारी मिलने के साथ विज्ञान, गणित, फिजिक्स, केमिस्ट्री और आधुनिक तकनीक का ज्ञान भी दिया जाना चाहिए। उनके अनुसार भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान का मेल ही भारत को आगे ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
गुरुकुलीय शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत
करनाल में बाबा रामदेव ने स्वामी धर्मानंद शास्त्री छात्रावास समेत गुरुकुल के नए भवनों का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित गुरुकुलीय शिक्षा परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति और संस्कारों पर आधारित इस शिक्षा व्यवस्था को मौजूदा समय की जरूरतों के अनुरूप और मजबूत किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी हासिल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में चरित्र, संस्कार, राष्ट्रभावना और आत्मनिर्भरता की भावना भी विकसित होनी चाहिए। साथ ही आधुनिक दुनिया की चुनौतियों से मुकाबला करने के लिए बच्चों को विज्ञान और तकनीक में भी दक्ष बनाया जाना जरूरी है।
एक लाख विद्यालयों को भारतीय शिक्षा बोर्ड से जोड़ने का लक्ष्य
बाबा रामदेव ने भारतीय शिक्षा बोर्ड का जिक्र करते हुए कहा कि देश में ऐसी शिक्षा व्यवस्था तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें भारतीय मूल्यों के साथ आधुनिक आवश्यकताओं को भी स्थान मिले। उन्होंने दावा किया कि इस वर्ष करीब एक लाख विद्यालयों को भारतीय शिक्षा बोर्ड से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा में बदलाव किसी व्यक्ति या संस्था का निजी एजेंडा नहीं, बल्कि देश के भविष्य से जुड़ा विषय है। यदि बच्चों को बेहतर और संस्कारयुक्त शिक्षा मिलेगी तो आने वाली पीढ़ी देश के विकास में अधिक प्रभावी योगदान दे सकेगी।
बोले—सबसे बड़ा आंदोलन शिक्षा व्यवस्था बदलने का
अपने आंदोलनों को लेकर पूछे गए सवाल पर बाबा रामदेव ने कहा कि वर्तमान समय में सबसे बड़ा आंदोलन देश की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव का होना चाहिए। उन्होंने वन नेशन, वन एजुकेशन और वन नेशन, वन इलेक्शन की पैरवी की।उन्होंने कहा कि शिक्षकों का काफी समय चुनावी ड्यूटी में चला जाता है, जिसका असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है। यदि देश में एक साथ चुनाव की व्यवस्था लागू होती है तो शिक्षकों को बार-बार चुनावी ड्यूटी में लगाने की जरूरत कम होगी और उनका अधिक समय विद्यार्थियों की शिक्षा के लिए उपलब्ध हो सकेगा।
राहुल गांधी के आंदोलन पर भी साधा निशाना
राहुल गांधी के आंदोलन से जुड़े सवाल पर बाबा रामदेव ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता हासिल करने का रास्ता जनता के वोट से होकर गुजरता है।उन्होंने कहा कि सड़क से संसद तक हंगामा और अराजकता करने से लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत नहीं होती।उन्होंने बच्चों को थाने, डीएम या एसएसपी कार्यालय का घेराव करने के लिए प्रेरित किए जाने को भी उचित नहीं बताया। बाबा रामदेव ने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन का अधिकार है, लेकिन किसी भी आंदोलन को संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाना चाहिए।
वंदे मातरम विवाद पर बोले—पहले संस्कृति को समझें
वंदे मातरम को लेकर चल रहे विवाद पर भी बाबा रामदेव ने अपनी प्रतिक्रिया दी।उन्होंने कहा कि भारत माता उनके लिए सर्वस्व हैं।उनके मुताबिक भारतीय संस्कृति,संस्कृत भाषा और देश की परंपराओं का पर्याप्त अध्ययन नहीं होने के कारण कुछ लोग भारतीय प्रतीकों और परंपराओं के महत्व को पूरी तरह नहीं समझ पाते।उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और उसकी परंपराओं को गहराई से समझने के बाद ही उनके वास्तविक महत्व का बोध हो सकता है। बाबा रामदेव ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत को शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
बृजभूषण सिंह के बयान पर दिया जवाब
बृजभूषण सिंह की ओर से उनके खिलाफ दिए जा रहे बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि जिन लोगों की सोच छोटी या घटिया है,उनके बारे में वह ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहते। उन्होंने कहा कि स्वामी रामदेव की पहचान उनके काम से है।बाबा रामदेव ने योग, आयुर्वेद और स्वदेशी के क्षेत्र में अपने कार्यों को अपनी पहचान बताया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति की पहचान उसके काम और योगदान से होती है,न कि किसी के बयान से।
शिक्षा और संस्कृति पर रहा मुख्य जोर
करनाल में बाबा रामदेव के पूरे संबोधन के केंद्र में शिक्षा व्यवस्था और भारतीय संस्कृति रही। उन्होंने एक ओर गुरुकुलीय शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कारों को मजबूत करने की बात कही, वहीं दूसरी ओर विद्यार्थियों को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़ने की जरूरत बताई।उन्होंने समान शिक्षा व्यवस्था, एक साथ चुनाव और शिक्षकों को चुनावी ड्यूटी से होने वाले शैक्षणिक नुकसान जैसे मुद्दों को भी उठाया। साथ ही उन्होंने भारतीय संस्कृति, संस्कृत और देश की परंपराओं की समझ को शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।बाबा रामदेव ने कहा कि यदि भारत को मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाना है तो शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव करना होगा। भारतीय संस्कारों, ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के बीच संतुलन बनाकर ही ऐसी पीढ़ी तैयार की जा सकती है, जो देश को नई दिशा देने में सक्षम हो।







