यमुनानगर (अंकुर कपूर): सरकारी बसों में आखिर मौत का जानलेवा सफर क्यों करने को मजबूर हैं। यमुनानगर के स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ने के लिए रोजाना हजारों छात्र शहर आते हैं, लेकिन घर से स्कूल या कॉलेज पहुंचने की ये गारंटी नहीं है कि कब पहुंचे और कैसे। ये हालात हैं यमुनानगर में पढ़ने वाले छात्रों के। इन तस्वीरों से काफी हद तक ये साबित हो रहा है कि बस में सवारियों के बीच छात्र एक-दूसरे को बस में धकेलकर पैर रखने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ सफल भी हो रहे हैं तो कुछ मायूस होकर अगली बस के इंतजार में खड़े हो जाते हैं।
बेहतर शिक्षा के लिए ग्रामीण इलाके से छात्र शहर का रुख करते हैं। प्रतापनगर से डारपुर और नगली तक के छात्र यमुनानगर में बस में सफर करते हैं ऐसे में बसों की संख्या सीमित है और छात्रों की तादाद ज्यादा छात्र जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं। दूसरी तरफ सर्दी का मौसम यमुनानगर डिपो के जीएम बालकराम भी मानते हैं कि बसों की संख्या जितनी होनी चाहिए उतनी नहीं है, लेकिन उन्हें आस तो है कभी तो ये आंकड़ा बढ़ेगा और छात्र जोखिम फ्री सफर करेंगे। बालकराम ये भी बताते हैं कि ग्रामीण इलाकों में इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी, लेकिन इससे ज्यादा डीजल बसों की हैं। ताकि छात्रों की पढ़ाई भी बाधित ना हो और बसों के बाहर लटककर ना जाना पड़े। फिलहाल ये देखना दिलचस्प होगा कि कितने दिनों में ये भयानक तस्वीर राहत में बदलती है।








