जींद प्रशासन ने बॉर्डर पर कई स्तर की बैरिकेडिंग कर रास्ता बंद किया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों को दिल्ली की ओर आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। नरवाना नहर पुल और आसपास के संवेदनशील इलाकों में भी विशेष निगरानी रखी जा रही है।
किसानों का कहना है कि वे भारत-अमेरिका ट्रेड डील सहित न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, किसानों और खेत मजदूरों से जुड़े मुद्दों, कर्ज और पेंशन जैसी मांगों को लेकर दिल्ली जाना चाहते हैं। इस बार किसानों ने ट्रैक्टर-ट्रालियों के बजाय पैदल मार्च का रास्ता चुना है। प्रस्तावित पदयात्रा करीब 228 किलोमीटर की है और 29 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचने का कार्यक्रम बताया गया है।
हरियाणा प्रशासन और किसान प्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी हुई है। प्रशासन की ओर से किसानों की मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात कराने का आश्वासन दिया गया, लेकिन किसान प्रतिनिधियों ने इसे स्वीकार नहीं किया। किसानों का कहना है कि उनकी प्रमुख मांगें केंद्र सरकार से जुड़ी हैं, इसलिए उनकी बैठक केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ कराई जानी चाहिए।
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में आगे की रणनीति पर सोमवार को खनौरी बॉर्डर पर चर्चा होने की संभावना है। किसान नेताओं ने कहा है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें केंद्र तक पहुंचाना चाहते हैं। वहीं, हरियाणा पुलिस और प्रशासन किसी भी स्थिति से निपटने के लिए लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।







