पानीपत। हरियाणा के पानीपत जिले से एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें 12 वर्षीय बालिका के साथ लंबे समय तक कथित यौन उत्पीड़न और प्रताड़ना किए जाने के आरोप लगे हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जबकि आरोपित महिला और उसका पुत्र कथित तौर पर फरार बताए जा रहे हैं।
तहसील कैंप थाना क्षेत्र में दर्ज शिकायत के अनुसार पीड़ित बालिका के पिता ने आरोप लगाया है कि उनकी अनुपस्थिति का फायदा उठाकर उनकी दूसरी पत्नी और उसके पुत्र ने बच्ची के साथ अमानवीय व्यवहार किया। पिता का कहना है कि वह पेशे से ड्राइवर हैं और काम के सिलसिले में अक्सर घर से बाहर रहते थे। इसी दौरान कथित रूप से यह घटनाएं सामने आईं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बालिका को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था तथा उसे स्कूल जाने से भी रोका जाता था। पिता के अनुसार हाल ही में घर लौटने पर बेटी ने उन्हें रोते हुए पूरी घटना की जानकारी दी, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।
पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया और पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण कराया। अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच विभिन्न पहलुओं से की जा रही है तथा सभी साक्ष्यों को एकत्र किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक आरोपित महिला अपने वयस्क पुत्र और एक अन्य बच्चे के साथ घर छोड़कर चली गई है। पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश देकर उनकी तलाश कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि आरोपितों को जल्द गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं।
इस मामले का संज्ञान हरियाणा राज्य महिला आयोग ने भी लिया है। आयोग की चेयरपर्सन ऊषा प्रियदर्शिनी ने मामले को गंभीर बताते हुए पुलिस अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बालिका की सुरक्षा, काउंसलिंग और न्याय सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
महिला आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि बच्चों के खिलाफ अपराधों के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं पुलिस प्रशासन का कहना है कि पीड़िता को आवश्यक सुरक्षा और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है तथा मामले की जांच प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है।
बाल संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पीड़ित बच्चों को कानूनी सहायता के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक परामर्श और सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराना भी बेहद जरूरी है, ताकि वे इस कठिन दौर से उबर सकें और सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।







