पंचकूला। हरियाणा के पहाड़ी क्षेत्र मोरनी में प्राकृतिक और जैविक मिर्च की खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में उद्यान विभाग ने महत्वपूर्ण पहल की है। विभाग की ओर से पंचायत घर, मोरनी में एमडीएच कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कार्यक्रम के तहत प्राकृतिक एवं जैविक मिर्च की खेती पर एक दिवसीय किसान प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में क्षेत्र के करीब 80 किसानों ने भाग लेकर आधुनिक कृषि तकनीकों और प्राकृतिक खेती के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी हासिल की।
प्रशिक्षण शिविर में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाने से उत्पादन लागत में कमी आती है, मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है और रसायन मुक्त गुणवत्तापूर्ण फसल तैयार होती है। उन्होंने कहा कि ऐसे उत्पादों की बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना भी अधिक रहती है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेश लाठर और डॉ. गजेंद्र ने किसानों को मिर्च की प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री के चयन, खेत की वैज्ञानिक तैयारी, पोषक तत्वों के संतुलित प्रबंधन, जीवामृत सहित प्राकृतिक आदानों के उपयोग, कीट एवं रोग नियंत्रण के जैविक उपाय, सिंचाई प्रबंधन तथा अधिक उत्पादन प्राप्त करने की आधुनिक तकनीकों के बारे में विस्तार से समझाया।
उद्यान विकास अधिकारी प्रत्युष चौहान ने किसानों को विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए प्राकृतिक खेती के साथ कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यदि किसान वैज्ञानिकों द्वारा सुझाई गई तकनीकों को अपनाते हैं तो मिर्च की खेती अधिक लाभदायक और टिकाऊ बन सकती है। इससे उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ने के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान किसानों ने प्राकृतिक खेती, जैविक उत्पादन और कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से जुड़ी योजनाओं में विशेष रुचि दिखाई। विशेषज्ञों ने किसानों के सवालों के जवाब देते हुए उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने और प्राकृतिक खेती के माध्यम से बेहतर उत्पादन हासिल करने के लिए प्रेरित किया। इससे मोरनी क्षेत्र में प्राकृतिक मिर्च की खेती को नई दिशा मिलने और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।







