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80 साल की उम्र में जलयोग से फिटनेस का संदेश, प्रताप डागर बने युवाओं के लिए प्रेरणा

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सुन्दर कुंडू ,पलवल |  अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को लेकर देशभर में तैयारियां और योग प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो चुके हैं। इसी बीच हरियाणा के पलवल जिले से एक ऐसा प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जिसने योग के प्रति लोगों की सोच को नया आयाम दिया है। जिले के गांव धतीर निवासी 80 वर्षीय प्रताप सिंह डागर पिछले 17 वर्षों से जलयोग (पानी में योग) का अभ्यास कर रहे हैं और आज भी घंटों तक पानी के भीतर विभिन्न योग क्रियाएं कर लोगों को स्वस्थ जीवन का संदेश दे रहे हैं।

प्रताप सिंह डागर का मानना है कि योग और जल का संयोजन शरीर तथा मन दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी है। उनका कहना है कि पानी में किए गए प्राणायाम और योगाभ्यास से सामान्य योग की तुलना में अधिक लाभ मिलता है। इससे शरीर की सहनशक्ति बढ़ती है, मानसिक तनाव कम होता है और कई शारीरिक बीमारियों से राहत मिलती है।

योगाचार्य प्रताप डागर ने बताया कि जलयोग की शुरुआत उन्होंने वर्षों पहले तब की थी, जब वह अपने बेटे के पास नोएडा गए थे। वहां एक स्विमिंग पूल में उन्होंने पहली बार पानी के भीतर योग करने का प्रयास किया और धीरे-धीरे इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया। इसके बाद उन्होंने जलयोग को नई पहचान दिलाने का संकल्प लिया और लगातार अभ्यास करते हुए इस क्षेत्र में महारत हासिल की।

उन्होंने बताया कि जलयोग उच्च रक्तचाप, कब्ज, गैस, अजीर्ण, हृदय रोग और तनाव जैसी समस्याओं में लाभकारी साबित होता है। इसके अलावा यह शरीर को लचीला बनाता है, मांसपेशियों के दर्द को कम करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है। उनका दावा है कि पानी में योग करने से शरीर को दोगुना लाभ मिलता है, क्योंकि पानी शरीर को प्राकृतिक रूप से रिलैक्स करता है और गर्मी से भी राहत देता है।

प्रताप डागर केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं हैं। वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी योग का प्रदर्शन कर चुके हैं तथा जलयोग को बढ़ावा देने के लिए कई देशों में प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा ले चुके हैं। उनके योगदान के लिए उन्हें विभिन्न संस्थाओं द्वारा कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है।

स्विमिंग पूल ट्रेनर एवं जलयोग का प्रशिक्षण ले रहे जसमाल कुंडू ने बताया कि जलयोग एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है, लेकिन नियमित अभ्यास से इसे आसानी से सीखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि उन्हें स्वयं इस अभ्यास से शारीरिक और मानसिक लाभ मिल रहे हैं।

80 वर्ष की आयु में भी प्रताप सिंह डागर का उत्साह और ऊर्जा युवाओं के लिए मिसाल बनी हुई है। उनका संदेश साफ है कि यदि योग को जीवनशैली का हिस्सा बनाया जाए तो बढ़ती उम्र भी स्वस्थ और सक्रिय जीवन में बाधा नहीं बन सकती।

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