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करनाल टोल प्लाजा पर बीटेक छात्र से बेरहमी, कर्मचारियों पर ईंट-सरियों से हमला करने का आरोप

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करनाल। एनएच-709ए स्थित प्योंत करनाल–असंध टोल प्लाजा पर रात एक बीटेक छात्र के साथ कथित रूप से हुई बर्बर मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि टोल कर्मचारियों ने मामूली विवाद के बाद छात्र को घेरकर ईंटों, लोहे की सरियों, थप्पड़ों और मुक्कों से बेरहमी से पीटा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल छात्र की पहचान उपलाना गांव निवासी योगराज के रूप में हुई है, जिसे पहले करनाल के कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया और बाद में हालत गंभीर होने पर पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया।

घटना रात करीब 9 बजे की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, वाहन गांव कत्लाहेड़ी निवासी अशोक चला रहे थे। पीड़ित पक्ष का दावा है कि वाहन टोल टैक्स से छूट प्राप्त श्रेणी में शामिल था। आरोप है कि टोल प्लाजा पर मौजूद कुछ कर्मचारियों ने क्रॉसिंग को लेकर अचानक विवाद शुरू कर दिया और देखते ही देखते मामला हिंसक हो गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, करीब 10 टोल कर्मचारियों ने छात्र को घेर लिया और उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि कई कर्मचारी बिना वर्दी और नेम प्लेट के ड्यूटी कर रहे थे, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है। हमलावरों ने छात्र को जमीन पर गिराकर लगातार पीटा और ईंटों व लोहे जैसी वस्तुओं का इस्तेमाल किया। मौके पर मौजूद लोगों ने हस्तक्षेप कर किसी तरह युवक को बचाया।

घटना की सूचना मिलने पर डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों ने दो टोल कर्मियों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया, जबकि अन्य आरोपी मौके से फरार हो गए। बताया जा रहा है कि मारपीट की पूरी घटना सीसीटीवी कैमरों में भी कैद हुई है, जिसमें कई कर्मचारी वाहन की ओर दौड़ते दिखाई दे रहे हैं।

घटना के बाद इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि टोल प्लाजा पर कर्मचारियों द्वारा अभद्र व्यवहार और दबंगई की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से ऐसे मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि टोल कर्मी नियमों के पालन के बजाय आम लोगों के साथ गुंडागर्दी कर रहे हैं।

पीड़ित परिवार ने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI), जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की गई है। लोगों ने टोल कंपनी का टेंडर रद्द करने और बिना वर्दी व पहचान पत्र ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई है।

गौरतलब है कि प्योंत, कत्लाहेड़ी और गुल्लरपुर समेत कई गांव स्थानीय टोल फ्री श्रेणी में आते हैं। घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और टोल प्लाजा संचालन को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं।

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