चंडीगढ़। वैश्विक तनाव और बढ़ते तेल संकट के बीच हरियाणा सरकार ने प्रशासनिक खर्चों में कटौती को लेकर बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर अब प्रदेश में सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और मंत्रियों के विदेशी दौरों पर सख्ती लागू कर दी गई है। सरकार ने साफ किया है कि बेहद जरूरी परिस्थितियों को छोड़कर किसी भी विदेश यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सरकार के इस फैसले के बाद शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल का प्रस्तावित जापान दौरा भी रद्द कर दिया गया है। उन्हें अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के सिलसिले में जून में जापान जाना था, लेकिन नई नीति के चलते यात्रा पर रोक लगा दी गई। वहीं, श्रम एवं ऊर्जा मंत्री अनिल विज के विभाग में भी कर्मचारियों द्वारा निजी खर्च पर विदेश यात्रा की मांगों को मंजूरी नहीं दी गई।
सूत्रों के अनुसार अब किसी भी सरकारी कर्मचारी, अधिकारी या मंत्री को विदेश यात्रा के लिए सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से अनुमति लेनी होगी। सरकार का मानना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण बेहद जरूरी है।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने खुद भी सरकारी काफिले की गाड़ियों में करीब 50 प्रतिशत तक कटौती की है। साथ ही मंत्रियों और अधिकारियों से सादगी अपनाने तथा फिजूलखर्ची रोकने की अपील की गई है। इसी क्रम में कई मंत्री सप्ताह में एक दिन साइकिल या पैदल दफ्तर पहुंचकर ईंधन बचत और अनुशासन का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि सरकार की विस्तृत गाइडलाइन अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन शुरुआती संकेतों के मुताबिक केवल अत्यावश्यक सरकारी कार्यों के लिए ही विदेश यात्रा की अनुमति मिलेगी। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल का आकार सीमित रखा जाएगा और हर यात्रा से होने वाले सरकारी लाभ की समीक्षा भी की जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार का यह कदम आर्थिक अनुशासन और संसाधनों के संतुलित उपयोग का संकेत है। साथ ही यह भी दर्शाता है कि खर्चों में कटौती के नियम छोटे कर्मचारियों से लेकर शीर्ष स्तर तक समान रूप से लागू किए जाएंगे।







