फतेहाबाद | प्रदेश में इस बार मौसम का मिजाज गेहूं की फसल के लिए चुनौती बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जनवरी के अंत से फरवरी की शुरुआत तक प्रदेश में बरसात औसत से कम रही और कोहरे की कमी ने भी गेहूं की बढ़वार पर असर डाला है। कुल 24.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई गेहूं की फसल में सिरसा, फतेहाबाद और जींद प्रमुख उत्पादक जिले हैं, जहां लगभग 5.75 लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती हुई है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से 4 फरवरी तक सिरसा में केवल 3 मिलीमीटर, फतेहाबाद में 2.5 मिलीमीटर और जींद में 2.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। इस दौरान दिन का तापमान 22 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि फरवरी के दूसरे पखवाड़े में यह 27 डिग्री तक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। लगातार बढ़ते तापमान और कम बारिश के चलते गेहूं के दाने मोटे नहीं बन पा रहे हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की संभावना है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस माह का मौसम ठंडा बना रहता है, तो फसल के लिए राहत मिल सकती है। फिलहाल गेहूं में किसी भी प्रकार की बीमारी का प्रकोप नहीं देखा गया है। हालांकि, शुरुआती अनुमान बताते हैं कि इस बार 130 लाख टन से अधिक गेहूं उत्पादन होने की संभावना में 20-30 लाख टन की कमी हो सकती है।
हरियाणा देश का प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य है, जहाँ पंजाब और उत्तर प्रदेश के बाद सबसे अधिक उत्पादन होता है। राज्य का छोटा क्षेत्र (44,212 वर्ग किलोमीटर) पूरे देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का केवल 1.6 प्रतिशत है, लेकिन गेहूं उत्पादन में इसका योगदान 15 प्रतिशत के करीब रहता है। पिछले वर्षों में हरियाणा ने हरित क्रांति और मशीनीकरण के दौर में लगातार रिकॉर्ड उत्पादन किया है।
मौसम और तापमान के लगातार बदलाव के चलते किसान इस समय चिंतित हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि फसल की सुरक्षा और उत्पादन बढ़ाने के लिए सिंचाई व देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जाए।







