Home Haryana यमुनानगर 2025: प्रदूषण, जल संकट और पर्यावरणीय चुनौतियों से जूझता शहर

यमुनानगर 2025: प्रदूषण, जल संकट और पर्यावरणीय चुनौतियों से जूझता शहर

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यमुनानगर। वर्ष 2025 यमुनानगर के लिए पर्यावरण के लिहाज से चुनौतीपूर्ण रहा। हवा और पानी जैसी बुनियादी जरूरतों की गुणवत्ता लगातार सवालों के घेरे में रही। औद्योगिक गतिविधियों, बढ़ते ट्रैफिक और अनियंत्रित संसाधन उपयोग के कारण शहर को पूरे साल प्रदूषण और जल संकट का सामना करना पड़ा।

214 दिन खराब रही हवा

आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में यमुनानगर की हवा 214 दिन खराब श्रेणी में रही। फैक्ट्रियों से निकलता धुआं, वाहनों का बढ़ता दबाव और कूड़ा जलाने जैसी गतिविधियों ने हालात और बिगाड़े। जनवरी, फरवरी और अक्टूबर से दिसंबर तक प्रदूषण का स्तर ज्यादा रहा, जबकि सिर्फ 122 दिन ही ऐसे रहे जब एयर क्वालिटी इंडेक्स संतोषजनक दर्ज हुआ। 29 दिन स्थिति बेहद खराब रही, जिससे सांस और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ीं।

दूषित पानी को लेकर 28 हजार से ज्यादा शिकायतें

पेयजल की गुणवत्ता भी लोगों के लिए बड़ी समस्या बनी रही। वर्ष भर में जलापूर्ति को लेकर 28,529 शिकायतें दर्ज की गईं। जलापूर्ति एवं अभियांत्रिकी विभाग और स्वास्थ्य विभाग की जांच में सैकड़ों पानी के नमूने फेल पाए गए, जिससे कई इलाकों में साफ पानी की उपलब्धता पर सवाल खड़े हुए। विभागीय दावों के बावजूद समस्या पूरी तरह हल नहीं हो सकी।

भूजल स्तर में लगातार गिरावट

भूजल की स्थिति और भी चिंताजनक रही। व्यासपुर खंड में जरूरत से ज्यादा दोहन के कारण रेड जोन का खतरा गहराने लगा है। जिले के कई खंडों में जलस्तर 11 से 25 मीटर तक नीचे पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण पर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में हालात और बिगड़ सकते हैं।

एग्रो वेस्ट से उम्मीद की किरण

हालांकि, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कुछ सकारात्मक प्रयास भी सामने आए। जिले में एग्रो वेस्ट से ब्रिकिट्स और पैलेट बनाने वाली छह यूनिट्स संचालित रहीं, जिससे पराली जलाने में कमी आई और कोयले की खपत घटी। इससे प्रदूषण कम करने के साथ किसानों को अतिरिक्त आय का जरिया भी मिला।

हरियाली के लिए सामूहिक प्रयास

हरियाणा एनवायरमेंट सोसायटी और सामाजिक संगठनों ने पौधरोपण के जरिए शहर को हरा-भरा बनाने की कोशिशें जारी रखीं। पिछले 35 वर्षों से यह अभियान चल रहा है, लेकिन विकास कार्यों के नाम पर हरियाली कटने से प्रयासों पर असर भी पड़ा।

 

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