Home Haryana ‘गाली बंद घर’ अभियान के तहत सुनील जागलान ने किया देशव्यापी सर्वे

‘गाली बंद घर’ अभियान के तहत सुनील जागलान ने किया देशव्यापी सर्वे

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जींद  |   जींद से एम डी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस और ‘सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन’ के फाउंडर सुनील जागलान द्वारा कराए गए सर्वे में एक चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। उनके ‘गाली बंद घर’ अभियान के तहत हुए ग्यारह साल के बेसलाइन सर्वे से पता चला कि हरियाणा और देश के कई हिस्सों में मां बहन और बेटी से जुड़ी गालियां देना लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। खास बात यह है कि इस प्रवृत्ति में केवल पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाएं और लड़कियां भी शामिल हैं।

सर्वे में शामिल युवाओं में बीस प्रतिशत ने माना कि उन्हें गालियों की आदत ऑनलाइन वीडियो गेम सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म के कारण लगी। सर्वे में सात हजार से अधिक लोगों से बातचीत की गई जिसमें युवाओं के अलावा माता पिता शिक्षक डॉक्टर पुलिसकर्मी वकील और छोटे बड़े कारोबारी भी शामिल रहे।

सर्वे के अनुसार दिल्ली में अस्सी प्रतिशत पंजाब में अठहत्तर प्रतिशत उत्तर प्रदेश और बिहार में चौहत्तर प्रतिशत लोग गालियों का उपयोग करते हैं जबकि हरियाणा में यह आंकड़ा बासठ प्रतिशत है। कश्मीर में केवल पंद्रह प्रतिशत लोगों के गाली देने की बात सामने आई जो पूरे देश में सबसे कम है। इसके अलावा उत्तराखंड मध्य प्रदेश महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में भी यह प्रतिशत पचास के आसपास रहा।

सर्वे से यह भी सामने आया कि जिन स्कूलों और कॉलेजों में केवल लड़कियां पढ़ती हैं वहां भी छात्राएं मां बहन की गालियां इस्तेमाल कर रही हैं। कई लोगों ने यह स्वीकार किया कि अब गालियां देना उनकी आदत बन चुकी है और जब तक कोई चुटकुला गाली के साथ न हो उन्हें मजा नहीं आता।

सुनील जागलान ने कहा कि भाषा ही व्यवहार की नींव होती है और जब बच्चे अपने घर में ही ऐसी भाषा सुनते हैं तो वह उनके व्यवहार का हिस्सा बन जाती है। उन्होंने बताया कि गाली बंद घर अभियान को साल दो हजार चौदह में शुरू किया गया था और आज यह देश के साथ साथ विदेशों में भी सराहा जा रहा है।

इस अभियान के वीडियो पचास लाख से ज्यादा लोगों तक पहुंच चुके हैं और दो लाख से अधिक लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। देशभर में साठ हजार से ज्यादा घरों में गाली बंद चार्ट लगाए जा चुके हैं और हजारों स्कूल कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।

सुनील जागलान वही सरपंच हैं जिन्होंने साल दो हजार बारह में बेटी बचाओ अभियान की शुरुआत की थी जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई बार सराहा है। जागलान पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म को अमेरिका की हार्वर्ड और येल यूनिवर्सिटी में भी दिखाया गया है।

जागलान का यह प्रयास देश को यह सोचने पर मजबूर करता है कि गालियों को सामान्य मानने की सोच कब और कैसे बदलेगी। उनका मानना है कि घरों से शुरुआत कर इस बुरी आदत को समाज से खत्म किया जा सकता है।

 

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