जींद। जींद जिले के उचाना क्षेत्र स्थित गुरुकुल खेड़ा गांव में सरपंच पर वन विभाग की अनुमति के बिना 56 हरे पेड़ कटवाने और लगभग 14 लाख रुपये के आर्थिक घोटाले का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह कार्य पर्यावरण नियमों की अनदेखी कर किया गया, जिससे ना सिर्फ पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान हुआ बल्कि सरकारी धन का दुरुपयोग भी हुआ।
ग्रामीणों के अनुसार, यह पेड़ गुरुकुल खेड़ा और घोघड़िया गांव के बीच की पांच एकड़ पंचायत भूमि पर स्थित थे। ग्रामीणों का कहना है कि इनमें से अधिकतर पेड़ किकर और शीशम जैसे छायादार और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण थे। उनका आरोप है कि इस कटाई के लिए ना तो वन विभाग से पूर्वानुमति ली गई और ना ही कटे पेड़ों के बदले नए पौधे लगाए गए। जबकि सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार, एक पेड़ काटने पर 10 नए पौधे लगाना अनिवार्य होता है।
सभी आरोप निराधार – सरपंच
इस पूरे मामले पर सरपंच ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पेड़ों की कटाई गांव की कमेटी के सामूहिक निर्णय के तहत की गई थी। उन्होंने बताया कि संबंधित क्षेत्र में मुख्यतः पहाड़ी किकर और झाड़ियां थीं, जहां लगभग चार महीने पहले जंगली सुअरों का आतंक बढ़ गया था। इन जानवरों ने फसलों के साथ-साथ ग्रामीणों को भी चोट पहुंचाई थी।
सरपंच ने दावा किया कि स्थिति से निपटने के लिए ग्राम कमेटी द्वारा पेड़ों की कटाई और नए पौधे लगाने का निर्णय लिया गया था, और वृक्षारोपण की जिम्मेदारी भी कमेटी ने ही ली है। उन्होंने ग्रामीणों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया।







