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मधुमक्खी के जहर बी वैनम को बेचकर बन सकते हैं करोड़पति… जानिए बी वैनम की खासियत

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करनाल, 26 मार्च-एक ग्रामीण क्षेत्र में रहते हुए अपनी आय को बढ़ाना किसानों को सबसे मुश्किल लगता है। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। बी वैनम यानी मधुमक्खी का जहर बाजार में करोड़ों रुपए में बिकता है।मधुमक्खी के शहद के साथ साथ मधुमक्खी के जहर वी वैनम को बेचकर करोड़पति बन सकते हैं।आज के समय में आपने लोगों को मधुमक्खी का शहद बेचते हुए देखा होगा। बी-वेनम की कीमत 2 हजार से 12 हजार रुपये प्रति ग्राम तक होती है, जिसका उपयोग फार्मा और कॉस्मेटिक कंपनियां दर्द निवारक दवाओं और एंटी-एजिंग क्रीम बनाने में करती हैं। कंपनियां बी-कीपर के पास फ्री में सेटअप लगाकर बी वेनम इक्कठा करती हैं, जिससे किसान बिना किसी अतिरिक्त खर्च के लाभ कमा सकते हैं। 100 मधुमक्खी बॉक्स से महीने में 12 से 17 हजार रुपये तक कमाए जा सकते हैं।मधुमक्खी पालन अब सिर्फ शहद उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि किसान बी-वेनम भी अच्छी कमाई कर सकते हैं जिससे उनकी आय में इजाफा होगा और देश की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
करनाल के घरौंडा स्थित इंडो इजराइल सब्जी केंद्र उत्कृष्ट सब्जी केंद्र में 11 वें मेगा सब्जी मेले में भारत की एक कंपनी द्वारा इजात की गई बी वैनम निकालने वाली मशीन को उनके विशेषज्ञों द्वारा प्रदर्शित किया गया। विस्तार से जानकारी देते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि आखिर क्यों मधुमक्खियों के जहर इतना कीमती है और ये किस काम में आता है।
क्या है बी वैनम और क्यों है इतना महंगा:
आप सभी को कभी न कभी मधुमक्खी ने जरूर काटा होगा। इसके काटने के बाद आपके शरीर में एक डंक रह जाता है और जहां ये डंक लगा रह जाता है, वहां सूजन और खुजली होने लगती है। ऐसा इसलिए क्योंकि मधुमक्खी के इस डंक में जहर होता है। यही मधुमक्खी का कीमती जहर कैंसर जैसी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा एक मधुमक्खी अपने जीवन में बेहद कम ही मात्रा में जहर छोड़ सकती है। यह भी एक कारण है जिसकी वजह से वी वैनम की कीमत बहुत ज्यादा है।
बी वेनम या मधुमक्खी के जहर के फायदे 
मधुमक्खी के जहर का उपयोग बहुत सी दवाओं में और बीमारियों के इलाज में किया जाता है। आपको बता दें कि कुछ लाइलाज बीमारी जैसे गठिया, ब्रेस्ट कैंसर और कई दूसरी तरह के कैंसर की दवाओं में ये जहर उपयोग में लिया जाता है। ऐसे कई देसी उपाय भी हैं, जिनके मुताबिक गठिया को ये बी वेनम पूरी तरह से ठीक कर सकता है।
मधुमक्खी का जहर एकत्रित करने में लागत:
अगर आप पहले ही मधुमक्खी पालन कर रहे हैं तो जहर एकत्रित करने के लिए आपको ये जहर एकत्रित करने वाली मशीन खरीदनी होगी। इस एक मशीन की कीमत करीब 10 से 12 हजार रुपए है। ऐसे में अगर आप ये मशीन 100 से 200 खरीदें तो आप अच्छी मात्रा में जहर एकत्रित कर पाएंगे।
कंपनी द्वारा सेटअप निशुल्क लगाया जाता है :
इसमें कंपनी बी-कीपर के पास जाती है और फ्री में बी-वेनम निकालने का सेटअप लगाकर आती है। जब बी-वेनम तैयार हो जाता है तो कंपनी की टीम बी-कीपर के पास जाती है और वहां से बी-वेनम क्लेक्ट करके ले आती है। अगर कोई किसान 100 बॉक्स से मधु मक्खी पालन करता है तो वह महीने के 12 से 17 हजार रुपए कमा सकता है। अगर किसी के पास 500 बी-बॉक्स है तो वह 75 हजार रुपए तक मंथली इनकम ले सकता है।
मशीन की वर्किंग:
कंपनी के विशेषज्ञ संजय तक्षक ने बताया कि हमने बी-वेनम के लिए एक मशीन बनाई है। किसानों की आय को बढ़ाने में कारगर सिद्ध हो सकती है। मशीन के सेटअप में प्लास्टिक का डोम्ब, पैनल, कांच की स्लाइड और एक मशीन होती है। पैनल में कांच की स्लाइड फिट करके उसके मधुमक्खी के बॉक्स पर रख दिया जाता है और उपर से डॉम्ब ढक दिया जाता है। एक मशीन पर 10 पैनल सेट किए जा सकते है। पैनल में छोटी छोटी रॉड लगी होती है। जिनसे माइक्रो करंट होता है। मधुमक्खिों को सिर्फ हल्का सा झटका देता है। जैसे ही बॉक्स से मधुमक्खी बाहर आती है और पैनल पर बैठती है तो झटके की वजह से मधुमक्खी अपना वेनम कांच पर छोड़ देती है। मधुमक्खी पालन करने वालो में भ्रांतियां रहती है कि इससे मधुमक्खी मर जाती है और उसका कांटा निकल जाता है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता। अगर मधुमक्खी किसी को डंक मारती है तो उस दौरान उसका कांटा मानव शरीर में फंस जाता है और उसकी वजह से वह मर जाती है, लेकिन मशीन में सिर्फ वह अपना जहर छोड़ती है, कांटा नहीं। मधुमक्खी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा, वह जैसा काम करती है, वह करती रहेगी।
मधुमक्खी के जहर की कीमत:
अगर आप बी वेनम एकत्रित कर खुद बेचकर कमाई करना चाहते हैं तो बता दें कि इसकी कीमत आपको 8 से 10 हजार रुपए ग्राम में बिक सकता है। यानी अगर आप इस जहर की मात्रा एक किलो रखें तो इससे आपको 80 लाख से 1 करोड़ रुपए तक मिल सकता है। हालांकि इसमें जहर की गुणवत्ता का बेहतर होना बहुत जरूरी है। इसके अलावा आप मधुमक्खी का जहर कितना एकत्रित कर पाते हैं, ये भी इसकी कीमत को बढ़ा या घटा सकता है।
शहद का जो रेट चाहिए वह नहीं मिलता:
संजय बताते है कि मधु मक्खी पालक बी-वेनम कंसेप्ट की तरफ बढ़ रहे है, क्योंकि इसके रिजल्ट अच्छे है और भविष्य में इसकी डिमांड बढ़ने वाली है, क्योंकि मधुमक्खी पालक सिर्फ शहद का ही प्रोडक्शन ले पाते है और शहद का रेट भी उनको सही नहीं मिल पाता और शहद बेचने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। शहद के रेट से भी सही नहीं मिल पाते। अगर मधुमक्खी पालक बढ़ते है तो वह देश के लिए भी अच्छा है और पोलिनेशन के लिए भी अच्छा है। अगर मधुमक्खी पालक घटते है तो वह देश के लिए ठीक नहीं है।
एक्सपोर्ट होता है तो देश की आर्थिक स्थिति में भी हाेगा सहयोग:
 बी-वेनम का एक्सपोर्ट अगर शुरू होता है तो निश्चित ही किसान भाइयों सहित देश की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। क्याेंकि हमारे देश के प्रधानमंत्री का भी मानना है कि हमारे देश में 2 हजार मिलियन बी-कालोनी होनी चाहिए। अगर यह बी-वेनम अच्छी तरह से निकले और मार्किट में बिकने लग जाता है तो प्रधानमंत्री के सपने को फलीभूत करने में हमारा भी योगदान हो जाएगा।
लक्ष्य क्या है:
संजय बताते है कि नेशनल बी-बोर्ड और बागवानी विभाग के सहयोग से आईबीडीसी रामनगर में भी बी-कीपरों को लगातार ट्रैनिंग दी जा रही है जिससे बी-कीपर अपने इस उद्योग में सफल हो रहे है। यह लोग भी अन्य किसान भाइयों को इस काम की ट्रेनिंग दे तांकि वो भी आर्थिक मजबूत हों और यह उद्योग और आगे बढे।

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