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लिंगानुपात सुधार में करनाल बना प्रदेश का सिरमौर, सीएम ने अतिरिक्त उपायुक्त को किया सम्मानित

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करनाल,10 मार्च – बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान प्रदेश में जन आंदोलन का रूप ले चुका है।जिसके चलते लिंगानुपात सुधार में करनाल जिला में 1 हजार लडक़ों की तुलना में 926 का आंकड़ा पार कर गया है और करनाल जिला प्रदेश का सिरमौर बन गया है। इस उपलब्धि के लिए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर पंचकूला में गत दिवस आयोजित राज्य स्तरीय महिला सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने करनाल जिला प्रशासन की ओर से अतिरिक्त उपायुक्त यश जालुका और महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी सीमा प्रसाद को लिंगानुपात सुधार में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर 2 लाख 50 हजार रूपये की राशि का चेक और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया, जोकि, करनाल जिलावासियों के लिए गर्व की बात है।
आंकड़ो पर एक नजर:
बता दें कि वर्ष 2014 में जिला में लिंगानुपात 886 था, वर्ष 2018 में यह अनुपात बढक़र 934 हुआ, वर्ष 2023 में लिंगानुपात 908 हो गया जो कि वर्ष 2022 के लिंगानुपात से 5 पाइंट ज्यादा था। गत वर्ष 2024 में लिंगानुपात सुधार होकर 926 का आंकड़ा पार कर गया, जोकि वर्ष 2014 की तुलना में 40 पाइंट ज्यादा है। कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराई को रोकने तथा लिंगानुपात की स्थिति में सुधार लाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, आपकी बेटी-हमारी बेटी जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई जा रही हैं और इन योजनाओं का महिलाओं को लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है।
20 हजार से ज्यादा दम्पति बच्चों को गोद लेने को तैयार
जिला स्वास्थ्य विभाग की उप सिविल डॉ सर्जन शीनू शर्मा ने लिंग अनुपात में लड़कियों की संख्या में इजाफा होने की वजह बताई उन्होंने बताया कि पंजीकरण के बगैर सरकारी व गैर सरकारी अस्पताल अल्ट्रासाउंड नही करेगा,हमने 2024 से गर्ववती महिलाओं का पंजीकरण करना शुरू किया, जिसमे समय लगा किन्तु परिणाम अच्छे आये। इसमें अगर कोई भी महिला अगर गर्वपात करवाती है तो इसकी जानकारी विभाग तक पहुंचेगी।उन्होंने बताया कि हर मीटिंग ओर अभियान में लोगो से अपील की जा रही है कि सी डबल्यू सी के पास 20 हजार से भी ज्यादा की संख्या के ऐसे दम्पति है जो बच्चो को गोद लेना चाहते है। उन्होंने बताया गर्ववती महिला बच्चे को जन्म दे,अगर वो तीसरी या चौथी लड़की होने पर उसे नही रखना चाहती तो सी डबल्यू सी से सम्पर्क कर उसे गोद दिलवा दे किन्तु गर्व में ही उसका कत्ल ना करें।
विभाग की टीम का काम सराहनीय:
जिला सिविल सर्जन डॉ लोकवीर ने बताया कि विभाग का टीम वर्क सराहनीय रहा जिस कारण से करनाल ओर यमुनानगर जिले में लिंगानुपात के आंकड़ों में सुधार हुआ है और प्रदेश में अव्वल स्थान पर आया है।उन्होंने बताया कि भ्रूण ह.त्या को रोकने के लिए पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत निगरानी रखी जाती है. इसके साथ ही बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के तहत बेटियों और बेटों में भेदभाव न हो, इसको लेकर लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। टीमवर्क के चलते करनाल जिला इस उपलब्धि को हासिल करने में सफल हुआ है।

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