06 नवंबर, यमुनानगर–कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाने वाले छठ पर्व के लिए यमुनानगर में रहने वाले पूर्वांचल के लोगों ने बड़े स्तर पर तैयारी कर ली है। पश्चिमी यमुनानगर के किनारे मेला छठ पूजा के लिए बेदी पर रंग-रोगन और घाट को सजाने के लिए काम चल रहा है। पूर्वांचल के लोगों में इस पर्व को लेकर काफी उत्साह दिख रहा है।
सूर्योपासना का अनुपम लोकपर्व छठ मुख्य रूप से जहां बिहार, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है तो वहीं यमुनानगर में भी पूर्वांचल के लोगों की अच्छी खासी तादाद है जिसके चलते यमुनानगर में भी यह पर्व बड़े हर्ष और लाश के साथ मनाया जाता है। पूर्वांचल के लोगों की करीब 40 हजार की आबादी वाले यमुनानगर शहर में पश्चिमी यमुना नहर के किनारे पर्व को मानने वाले लोग पूजा अर्चना कर नहर में स्नान करते हैं।
भाजपा विधायक समस्या सुन कर भी नहीं निकाल पाए हल
जानकारी के मुताबिक महिलाएं पुत्र प्राप्ति के लिए इस पर्व पर व्रत रखती हैं। यह व्रत इतना कठोर होता है कि इस दिन बिना पानी के रहना पड़ता है। नदी में स्नान करने के बाद यह व्रत खोला जाता है। भले ही यमुनानगर में रहने वाले पूर्वांचल के लोग इसे अपना सौभाग्य मानते हो कि वह कृष्ण भगवान की बहन माने जाने वाली यमुना नदी में स्नान कर इस व्रत को खोलते हैं लेकिन जहां उनका स्नान घाट बना हुआ है वहां शहर के गंदे नाले गिरते हैं। जिससे एक तरफ तो इस पवित्र त्यौहार पर उन्हें गंदे पानी में नहाने को मजबूर होना पड़ता है तो वही बीमारियां फैलने का भी खतरा बन जाता है। श्रद्धालुओं ने कहा कि हर साल वह प्रशासन और स्थानीय नेताओं से इस समस्या को दूर करने के लिए आग्रह करते हैं लेकिन हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं.बता दें कि दशकों से यहां इसी तरह के हालात हैं स्थानीय लोगों का कहना है कि मौजूदा भाजपा विधायक घनश्याम दास अरोड़ा यहां निरीक्षण करने भी पहुंचे थे,लेकिन किसी तरह का कोई समाधान नहीं हुआ इसलिए वह उन्हें अब इस पर्व का न्योता भी नहीं देंगे.







