बहादुरगढ़: हरियाणा के बहादुरगढ़ की पारले बिस्कुट फैक्ट्री से 56 कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया गया है। फैक्ट्री से निकाले गए कर्मचारियों ने फैक्ट्री गेट के बाहर प्रदर्शन किया और मैनेजमैंट के खिलाफ नारेबाजी भी की। फैक्ट्री का तर्क है कि वेफर प्लांट को बंद कर दिया है जिसके चलते श्रम विभाग के नियमों के तहत कर्मचारियों का हिसाब किया गया है। वहीं कर्मचारियों का कहना है कि उन्हे बिस्कुट प्लांट से वेफर प्लांट में लगाया गया था। इसलिए उन्हें नौकरी पर बहाल करते हुए बिस्कुट प्लांट में काम पर लगाया जाए।

बेरोजगारी के मामले में सरकार पर अक्सर विपक्ष के हमले होते हैं। सरकार दावा करती है कि रोजगार के अवसर पैदा किए जा रहे हैं। उद्योगों में 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार का आरक्षण भी दिया गया। लेकिन कई जगह लोगों को रोजगार मिलने की बजाए लोगों का रोजगार खत्म हो रहा है। मामला बहादुरगढ़ की पारले बिस्कुट फैक्ट्री का है। पारले बिस्कुट फैक्ट्री में चिप्स और वेफर के लिए अलग से प्लांट लगाया गया था जिसमें 56 कर्मचारी काम कर रहे थे।

फैक्ट्री प्रबंधन का कहना है कि प्लांट बंद करने के बाद सरकार के विभाग की मंजूरी के बाद सभी 56 कर्मचारियों का हिसाब किया गया है। अब चूंकि प्रबंधन ने प्लांट बंद कर दिया है तो उस प्लांट में काम करने वाले कर्मचारियों का काम भी खत्म हो जाता है। बहादुरगढ़ के पारले बिस्कुट प्लांट में पारेल बिस्कुट और क्रैकजैक बिस्कुट भी बनता है। अभी सिर्फ एक प्लांट बंद हुआ है। वेफर प्लांट में भी बिस्कुट प्लांट से कर्मचारियों को शिफ्ट किया गया था। जबकि प्रबंधन श्रम नियमों के तहत भुगतान का दावा कर रहा है।







