करनाल। केंद्र सरकार ने कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) की आपूर्ति के लिए अंतिम तिथि बढ़ाकर 30 सितंबर कर राइस मिलरों को राहत देने की कोशिश की है, लेकिन भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा फिलहाल चावल की उठान बंद किए जाने से यह राहत व्यावहारिक रूप से बेअसर होती नजर आ रही है। एफसीआई के गोदामों में भंडारण क्षमता की कमी के चलते नई खेप स्वीकार नहीं की जा रही, जिससे जिले की अधिकांश राइस मिलों में मिलिंग कार्य लगभग ठप हो गया है।
करनाल जिले की करीब 237 राइस मिलें सीएमआर योजना के तहत सरकार के लिए धान की मिलिंग करती हैं। अब तक कुल निर्धारित लक्ष्य का लगभग 60 प्रतिशत चावल सरकार को सौंपा जा चुका है, जबकि करीब 40 प्रतिशत यानी लगभग 2 लाख 32 हजार मीट्रिक टन चावल की आपूर्ति अभी शेष है। समय सीमा बढ़ने के बाद मिलरों को उम्मीद थी कि वे निर्धारित अवधि में बाकी लक्ष्य भी पूरा कर लेंगे, लेकिन एफसीआई की ओर से डिलीवरी बंद किए जाने से उनकी चिंताएं बढ़ गई हैं।
राइस मिल संचालकों का कहना है कि तैयार चावल की उठान नहीं होने के कारण मिलिंग जारी रखना संभव नहीं है। उनके पास बड़े पैमाने पर तैयार माल के भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। वहीं, लंबे समय तक गोदामों में रखा चावल गुणवत्ता जांच, विशेष रूप से कलर टेस्ट में फेल होने का जोखिम भी बढ़ा देता है। यदि गुणवत्ता मानकों पर चावल खरा नहीं उतरता तो सरकार उसे अस्वीकार कर सकती है, जिससे पूरा आर्थिक नुकसान मिलरों को झेलना पड़ेगा।
मिल मालिकों का कहना है कि उत्पादन कार्य बंद होने के बावजूद कर्मचारियों का वेतन, बिजली के स्थायी शुल्क, मशीनों का रखरखाव और अन्य प्रशासनिक खर्च लगातार जारी हैं। इससे उद्योग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उनका मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो 30 सितंबर तक शेष सीएमआर लक्ष्य पूरा करना मुश्किल हो सकता है।
जुंडला राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान राजेंद्र मोंगा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा समय सीमा बढ़ाया जाना स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन एफसीआई द्वारा चावल की डिलीवरी नहीं लेने से मिलरों की परेशानियां बढ़ गई हैं। उन्होंने मांग की कि एफसीआई जल्द स्थिति स्पष्ट करे और चावल की उठान शुरू करे, ताकि राइस मिलर समय पर सीएमआर कार्य पूरा कर सकें और आर्थिक नुकसान से बच सकें।







