Home Haryana पंचकूला में मंत्री के सस्पेंशन आदेश पर भी नहीं हुई पुलिस कार्रवाई

पंचकूला में मंत्री के सस्पेंशन आदेश पर भी नहीं हुई पुलिस कार्रवाई

3
0

पंचकूला। दहेज उत्पीड़न के एक मामले में हरियाणा सरकार के मंत्री कृष्णलाल पंवार द्वारा महिला थाना की एसएचओ और जांच अधिकारी एएसआई को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए जाने के बावजूद एक सप्ताह बाद भी कार्रवाई नहीं हुई है। पुलिस विभाग ने दोनों अधिकारियों को निलंबित करने के बजाय पहले विभागीय जांच कराने का निर्णय लिया है। इस पर पीड़िता ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि मंत्री के आदेशों का ही पालन नहीं हो रहा है तो आम लोगों को न्याय कैसे मिलेगा।

जानकारी के अनुसार 20 जुलाई को आयोजित जिला ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में सेक्टर-15 निवासी मनीषा ने अपने दहेज उत्पीड़न मामले की पुलिस जांच पर गंभीर सवाल उठाए थे। शिकायत सुनने के बाद मंत्री कृष्णलाल पंवार ने महिला थाना की एसएचओ राजेश कुमारी और मामले की जांच कर रहीं एएसआई कविता को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए थे।

बैठक के दौरान डीसीपी अदिति ने पहले विभागीय जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई करने की बात कही थी, लेकिन मंत्री ने स्पष्ट कहा था कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ तत्काल निलंबन की कार्रवाई की जाए और जांच प्रक्रिया भी समानांतर रूप से जारी रहे।

हालांकि, मंत्री के निर्देशों के बावजूद पुलिस विभाग ने अब तक दोनों अधिकारियों को निलंबित नहीं किया है। विभाग का कहना है कि पहले विभागीय जांच पूरी की जाएगी और रिपोर्ट के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।

कार्रवाई में देरी पर पीड़िता मनीषा ने नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया कि पुलिस अपने अधिकारियों को बचाने का प्रयास कर रही है। उनका कहना है कि यदि मंत्री के आदेशों को भी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, तो आम नागरिकों की शिकायतों का समाधान कैसे होगा।

ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में मंत्री ने तीन प्रमुख बिंदुओं पर आपत्ति जताई थी। मुख्य गवाह को भेजे गए नोटिस की भाषा को उन्होंने अनुचित और डराने वाला बताया था। इसके अलावा जांच अधिकारी पर कथित तौर पर असंवेदनशील टिप्पणी करने का आरोप भी सामने आया, जबकि एसीपी ने भी स्वीकार किया था कि गवाह को भेजे गए नोटिस की भाषा उचित नहीं थी। इन्हीं कारणों के आधार पर मंत्री ने दोनों अधिकारियों के निलंबन के निर्देश दिए थे।

पीड़िता के अनुसार उनकी शादी वर्ष 2023 में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एक शाखा प्रबंधक से हुई थी। उनका आरोप है कि विवाह के बाद ससुराल पक्ष ने पहले ₹6 लाख और बाद में ₹10 लाख की अतिरिक्त दहेज की मांग की। मांग पूरी नहीं होने पर उनके साथ मारपीट की गई, उन्हें मायके छोड़ दिया गया और बाद में पति ने तलाक की याचिका दायर कर दी।

पीड़िता के पिता ने भी आरोप लगाया कि शादी और सगाई के दौरान ससुराल पक्ष ने बड़ी संख्या में मेहमानों के स्वागत, सोने के आभूषण और अन्य महंगे उपहारों की मांग की थी।

पीड़िता और उनके परिजनों ने कहा है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे अगली जिला ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में फिर से यह मुद्दा उठाकर मंत्री के आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग करेंगे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here