चंडीगढ़। हरियाणा में लगातार बढ़ रही गर्मी और उमस ने बिजली की खपत को नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है। मानसून की धीमी रफ्तार के चलते लोगों की निर्भरता कूलर और एयर कंडीशनर पर बढ़ गई है, जिससे बिजली व्यवस्था पर भारी दबाव बन गया है। भारत सरकार के आधिकारिक विद्युत प्रवाह पोर्टल के अनुसार 17 जुलाई को राज्य में बिजली की अधिकतम मांग 14,429 मेगावाट दर्ज की गई, जो अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है। इससे एक दिन पहले 16 जुलाई को यह मांग 14,255 मेगावाट थी। यानी केवल 24 घंटे में बिजली की मांग में 174 मेगावाट की वृद्धि हुई।
बढ़ती मांग के बीच बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार राज्य में 12.60 मिलियन यूनिट बिजली की कमी दर्ज की गई, जो कुल मांग का लगभग 6.10 प्रतिशत है। आपूर्ति में आई इस कमी के कारण कई जिलों में लंबे समय तक बिजली कटौती करनी पड़ी। हिसार के गंगवा गांव समेत कई स्थानों पर लोगों ने बिजली कटौती से परेशान होकर सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन भी किया।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हरियाणा सरकार को पावर एक्सचेंज से लगभग 1,479 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खरीदनी पड़ी। इससे ग्रिड पर बढ़ते दबाव को कम करने और उपभोक्ताओं को बेहतर आपूर्ति देने का प्रयास किया गया।
मौसम विभाग के अनुसार मानसून की सुस्ती का असर तापमान पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 3.7 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। रोहतक सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 40.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा भिवानी में 40.5 डिग्री और नारनौल में 40 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड हुआ। रात के समय भी लोगों को राहत नहीं मिली। फरीदाबाद में न्यूनतम तापमान 31.1 डिग्री और रोहतक में 30.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, जींद, भिवानी, रोहतक, गुरुग्राम और फरीदाबाद सहित कुल 16 जिलों में उमस भरी गर्मी को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है। हालांकि विभाग ने उम्मीद जताई है कि 19 जुलाई की रात से मौसम में बदलाव शुरू होगा और 20-21 जुलाई को मानसून दोबारा सक्रिय होने से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश हो सकती है। उत्तरी जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश की भी संभावना जताई गई है।
मौसम में संभावित बदलाव को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को फिलहाल बाजरा और ग्वार की बुवाई कुछ समय के लिए टालने की सलाह दी है, जबकि धान की रोपाई जारी रखने को कहा गया है। जिन क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना है, वहां कपास की फसल में जलभराव रोकने के लिए निकासी की उचित व्यवस्था रखने की सलाह दी गई है। साथ ही पशुपालकों को अत्यधिक उमस के कारण पशुशालाओं और पोल्ट्री फार्मों में साफ-सफाई और पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखने की हिदायत दी गई है।







