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ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भिवानी का स्वर्णिम पंच, पांच मुक्केबाजों ने जीते पांच गोल्ड

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भिवानी। मुक्केबाजी की दुनिया में ‘मिनी क्यूबा’ के नाम से पहचान रखने वाले भिवानी ने एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित कर दी। ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में जिले के पांच मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पांच स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। साक्षी चौधरी, जैस्मिन लंबोरिया, प्रीति पंवार, प्रिया घनघस और सचिन सिवाच ने अपने-अपने फाइनल मुकाबले जीतकर न केवल भारत का गौरव बढ़ाया, बल्कि भिवानी को भी खेल जगत में नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।

यह पहला अवसर है जब भिवानी की चार महिला मुक्केबाजों ने एक ही राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। पूरे टूर्नामेंट के दौरान इन खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया और फाइनल तक पहुंचकर देशवासियों की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा उतरते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किए।

भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर कार्यरत जैस्मिन लंबोरिया की स्वर्णिम जीत ने परिवार और खेल प्रेमियों को गर्व से भर दिया। बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली जैस्मिन ने इस बार स्वर्ण पदक जीतने का लक्ष्य रखा था, जिसे उन्होंने शानदार प्रदर्शन के दम पर हासिल कर लिया। उनकी मां जोगिंद्र कौर ने कहा कि बेटी की वर्षों की मेहनत और समर्पण का आज फल मिला है।

धनाना गांव की बेटी साक्षी चौधरी के फाइनल मुकाबले को देखने के लिए गांव में बड़ी स्क्रीन लगाई गई थी। जैसे ही साक्षी ने एकतरफा जीत दर्ज की, पूरा गांव खुशी से झूम उठा। परिवार ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण बताया। साक्षी की मां ने कहा कि बेटी के घर लौटने पर उसकी पसंदीदा खीर और चूरमा बनाकर खिलाया जाएगा।

प्रिया घनघस ने अपने करियर का पहला राष्ट्रमंडल स्वर्ण पदक जीतकर नई उपलब्धि हासिल की। फाइनल मुकाबले में जीत के बाद गांव में जश्न का माहौल बन गया। पिता महेंद्र और मां मीरा ने बताया कि प्रिया को अपनी मेहनत पर पूरा भरोसा था और उसने पहले ही स्वर्ण पदक जीतने का वादा किया था। अब उसके गांव पहुंचने पर भव्य स्वागत की तैयारी की जा रही है।

बड़ेसरा की प्रीति पंवार ने भी शानदार मुक्केबाजी का प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। परिजनों ने बताया कि ओलंपिक में पदक से चूकने के बाद प्रीति ने कड़ी मेहनत जारी रखी और विश्व व एशियाई स्तर पर सफलता हासिल करने के बाद राष्ट्रमंडल खेलों में भी गोल्ड जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

वहीं, सचिन सिवाच की जीत ने पूरे क्षेत्र को गर्व से भर दिया। उनके स्वर्ण पदक जीतते ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। माता-पिता और दादी ने इसे परिवार और देश के लिए गौरव का क्षण बताया। सचिन की बहन ने कहा कि भाई का यह गोल्ड मेडल रक्षाबंधन का सबसे बड़ा उपहार है।

कोचों और खेल विशेषज्ञों का मानना है कि भिवानी के मुक्केबाजों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यह धरती देश को विश्वस्तरीय मुक्केबाज देने में सबसे आगे है। पांच स्वर्ण पदकों के साथ भिवानी ने राष्ट्रमंडल खेलों में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा दिया है।

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