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हरियाणा की शर्मिला धनखड़ ने रचा इतिहास, कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता पैरा एथलेटिक्स का पहला स्वर्ण

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चंडीगढ़: हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले की बेटी शर्मिला धनखड़ ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। छितरौली गांव की रहने वाली शर्मिला ने महिलाओं की शॉट पुट एफ-57 स्पर्धा में 9.81 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके साथ ही वह कॉमनवेल्थ गेम्स की पैरा एथलेटिक्स में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली खिलाड़ी बन गई हैं।

शर्मिला की इस ऐतिहासिक सफलता पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि पूरे प्रदेश और देश के लिए गर्व का विषय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शर्मिला ने अपने शानदार प्रदर्शन से हरियाणा की खेल परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा प्रस्तुत की है।

शर्मिला धनखड़ की सफलता संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास की मिसाल भी है। महज दो वर्ष की उम्र में पोलियो के कारण उनका एक पैर प्रभावित हो गया था। आर्थिक कठिनाइयों के बीच उनका बचपन बीता और शादी के बाद भी उन्हें दहेज प्रताड़ना तथा घरेलू हिंसा जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। 26 वर्ष की उम्र में दो बेटियों के साथ उन्हें घर छोड़ना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपने जीवन को नई दिशा देने का संकल्प लिया।

जीवन के कठिन दौर के बाद दूसरी शादी में उनके पति अजीत का पूरा सहयोग मिला। परिवार के समर्थन और अपनी अथक मेहनत के बल पर उन्होंने पैरा एथलेटिक्स में लगातार अभ्यास किया। वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक के रूप में सामने आया, जिसने उन्हें भारतीय पैरा खेलों के इतिहास में विशेष स्थान दिला दिया।

भारत के लिए एक और अच्छी खबर पुरुषों की हाई जंप स्पर्धा से भी आई। भारतीय एथलीट सर्वेश कुशारे ने 2.25 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक अपने नाम किया। हालांकि वह स्वर्ण पदक से चूक गए, लेकिन उनके प्रदर्शन ने भारत के पदक अभियान को मजबूती दी।

शर्मिला धनखड़ की सफलता इस बात का प्रमाण है कि कठिन परिस्थितियां किसी भी व्यक्ति के सपनों को नहीं रोक सकतीं। दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर असंभव लगने वाले लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

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